Category - लेख साहित्य

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क्यूँ हंसा इतना दूर हुआ

देह गंध रह गई, सुगंधित मन कपूर काफूर हुआ । पिंजरा उजड रहा है मनसर,हंसा इतना दूर हुआ ।। चालें , घातें ,छलनाऐं,वर्जित अनुबन्ध बचे हैं शेष , कुटी हुई मिश्री सा...

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गणपति प्रभाती एवं वंदना

भारी मन से दें विदा, लंबोदर को आज। दस दिन का यह साथ था, पुलकित हुआ समाज।।28 हाथ जोड़ विनती करें, पुनः पधारें आप। भूल चूक सब कर क्षमा, हरें सकल संताप।।29 स्वागत...

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गणपति प्रभाती ९

बीत गये हैं नौ दिवस, चौदस आयी पास। निकट विदाई का दिवस, होता हृदय उदास।।25 उत्सव के इन नौ दिनों, चँहुदिशि मचती धूम। नृत्य गीत में हो मगन, सब जन जाते झूम।।26...

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गणपति प्रभाती ८

स्वामी विद्या बुद्धि के, हे लम्बोदर आप। दया दृष्टि से आपकी, मिटते सारे ताप।।22 सकल विश्व मे आपकी, आज पुनः दरकार। करो कलुषता दूर सब, हे गणपति सरकार।।23 गणपति के...

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हुनर को मिली पहचान

मामूली घर में जन्म लिया, जैसे कमल खिलता कीचड़ में, पर! पहचान बनाता सबसे आगे, वैसे ही पहचान मिली हुनर को। स्वच्छता से किया शुद्ध वातावरण, सफाई अभियान चलाया है...

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गणपति प्रभाती ७

छल प्रपंच अरु लोभ मद, इनका हो निस्तार। सकल शांति सद्भाव हो, सुखमय हो संसार।।19 हे गणेश सबकी करें, कुविचारों की शुद्धि। हिंसा जिनमें व्याप्त है, गणपति भरिये...

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हिंदी अंतस में विराजमान है तो उसे एक दिवस के दायरे में बाँधना कहाँ तक उचित है ।

मत्तगयंद सवैया अंक सुहाय लिएअचला नवजात किलोल करै यह हिंदी। मोह रही जन-मानस-मंदिर बोल खगोल चरै यह हिंदी । ब्रह्म निनाद सुपावन गुंजित ओम अमोल भरै यह हिन्दी ।...

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हिंदुस्तान हमारा है – हिंदी इसकी भाषा है

स से सबसे प्यारी है ब से बोली न्यारी है प से पूरी दुनिया मे ये छा जाने वाली है सुंदर सुंदर वर्णों की ये एक वर्णमाला है सबसे ज़्यादा पसंद हमें अपनी हिंदी भाषा है...

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“हो हिंदी स्वीकार”

समस्त विद्वतजनों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं (आधार छंद- सरसी छंद) हिंदी पढ़कर हिंदी लिखकर, इसका करें प्रचार। कैसे लोग इसे अपनायें, इस पर करें विचार।1 अगर चाहते...

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गणपति प्रभाती ६

दस दिन तक उत्सव चले, खुशी मने चहुँ ओर। गली – गली में गूँजता, जय बप्पा का शोर।।16 दर्शन को आतुर सभी, जपते गणपति नाम। सम्मुख आकर भक्ति से, करते उन्हें...

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