उत्तर प्रदेश मथुरा

अखिल भारतीय श्रीराम मित्र मण्डल के द्वारा गोविंदेश्वर हनुमान मन्दिर का वार्षिक मनोरथ महोत्सव विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ।

मथुरा। रंगेश्वर क्षेत्र स्थित कंस वध स्थल पर अखिल भारतीय श्रीराम मित्र मण्डल के द्वारा गोविंदेश्वर हनुमान मन्दिर का वार्षिक मनोरथ महोत्सव विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ। इस महोत्सव में हनुमान जी का चोला चढ़ाकर उनका वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन किया गया। साथ ही उन्हें दाल बाटी व मोदक आदि का भोग लगाया गया। सुंदरकांड, हनुमान चालीसा व बजरंग बाण आदि के संगीतमय सामुहिक पाठ सन्तों, विप्रों व भक्तों-श्रद्धालुओं के द्वारा किये गए।
इस अवसर पर आयोजित सन्त-विद्वत संगोष्ठी में मन्दिर के महन्त आचार्य रामदेव चतुर्वेदी ने कहा कि उनका गोविंदेश्वर हनुमान मंदिर कृष्ण कालीन मन्दिर है। पहले यहाँ कंस का अखाड़ा हुआ करता था। जिसमें वह मल्ल युद्ध करता था। उसका यह मानना था कि उसे इस स्थान पर मल्ल युद्ध करते समय यहां विराजित हनुमान जी ही ऊर्जा व शक्ति प्रदान करते हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा की गोविंदेश्वर हनुमान मंदिर का प्रांगण वही स्थान है जहां पर कि भगवान श्रीकृष्ण एवं उनके अग्रज बलराम जी ने अत्याचारी कंस का वध किया था।
आचार्य लवदेव चतुर्वेदी ने कहा कि गोविंदेश्वर हनुमान मन्दिर का इतिहास अति प्राचीन है। इस स्थान को पुनः जाग्रत व सिध्द करने का श्रेय मथुरा की प्रख्यात रामलीला मण्डली के संचालक एवं श्रीराम कथा के यशस्वी प्रवक्ता स्व. आचार्य गोविंद राम चतुर्वेदी (दादाजी) को है।
इस वार्षिक मनोरथ महोत्सव में आचार्य कुशदेव चतुर्वेदी,सोनार गौरांग मन्दिर के महन्त बाबा नारायण दास महाराज, महन्त रमणरेती दास, महन्त संतोष पुजारी, महन्त प्रियाशरण महाराज, महन्त सनातन दास महाराज, अरविंद चतुर्वेदी, वीरेंद्र कुमार विश्नोई, दिनेश कुमार त्रिपाठी, एडवोकेट पंकज चतुर्वेदी, दाऊदयाल शर्मा, नेत्रपाल ठाकुर, राधाकांत शर्मा, प्रधान मदन सिंह एवं श्रीमती कुंजलता चतुर्वेदी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। रात्रि को सरस् भजन संध्या का आयोजन सम्पन्न हुआ। जिसमें अनेक ख्याति नामा भजन गायकों ने भगवान श्रीराम की महिमा से ओतप्रोत भजनों का गायन कर सभी को भाव- विभोर कर दिया।

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