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दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में हीरक जयंती व्याख्यान का आयोजन

आगरा। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में आज हीरक जयंती व्याख्यान का आयोजन दीक्षांत सभागार में किया गया। इस अवसर पर मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के हर्मन ई. तथा रुथ जे. कोइंग इंडाउड पीठ के प्रोफेसर कल्याणमय देब ने व्याख्यान दिया।
उनके व्याख्या का विषय था- ‘ज्ञान की खोज: कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली काम करती है।‘ प्रो देब ने कहा कि दुनिया को जानने की जिज्ञासा ने मनुष्य को एक बेहतर स्थिति प्रदान की है। नई तकनीक की उपलब्धता के चलते मनुष्य का मस्तिष्क अब सिर्फ ‘कैसे के प्रश्न तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि अब वह ‘क्यों’ पहुँचना चाहता है। अपने इस विशेष व्याख्यान में उन्होने तेजी से उभरते इस विषय की ओर ध्यान आकृष्ट किया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की व्याख्या की जानी चाहिए। उन्होने कहा कि आज कृत्रिम बौद्धिकता के क्षेत्र में व्यवस्थित तरीके से इस बात को बताया जा सका है कि नियंत्रण प्रणाली कैसे काम करती है। उन्होने यह भी बताया कि मिशिगन यूनिवर्सिटी के क्वाइन लैब में इस दिशा में भी शोध चल रहा है कि कैसे खेल, वाहन नियंत्रण आदि ज्यादा जटिल क्षेत्रों में भी कृत्रिम बौद्धिकता को ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।
ध्यातव्य है कि डीईआई डायमंड जुबली मेमोरियल लेक्चर का आयोजन दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के संस्थापक श्रद्धेय डॉ. एम.बी. लाल साहब के नेतृत्व में 1977 में आयोजित ‘आरईआई – हीरक जयंती समारोह ‘ की शुभ स्मृति में किया जाता है।
आज के कार्यक्रम की शुरुआत में, प्रो. सी मारकन ने जहां डायमंड जुबली मेमोरियल व्याख्यान की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी वहीं प्रो. के स्वामी दया ने दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में कृत्रिम बौद्धिकता के संबंध में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों का विवरण दिया। डॉ प्रेम सुधीश ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया और प्रो सी पटवर्धन ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।
इस अवसर पर डी ई आई में शिक्षा की प्रगति तथा इसके विभिन्न आयामों को दर्शाते हुए एक लघु वीडियो फिल्म भी दिखाई गयी। साथ ही सांस्कृतिक आयोजन भी किए गए जिसमें कव्वाली तथा नन्हें-मुन्हें बच्चों की ओर से स्वास्थ्य-रक्षा पीटी का आयोजन प्रमुख रहा।
प्रो जे के वर्मा

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