आगरा उत्तर प्रदेश कार्यक्रम शिक्षा

केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा में गंगटोक, गेजिंग (सिक्किम) का ऑनलाइन भाषा संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम का समापन समारोह

आगरा। केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग द्वारा आॅनलाइन आयोजित कार्यक्रम दिनांक 22 फरवरी से 05 मार्च 2021 तक जिसमें जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, गंगटोक एवं गेजिंग (सिक्किम) के आॅनलाइन भाषा संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम का समापन समारोह आयोजत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. नारायण कुमार, निदेशक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, नई दिल्ली एवं मा. सदस्य-शासी परिषद, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. गिरिराजशरण अग्रवाल, निदेशक, शोध संस्थान, बिजनौर (उत्तर प्रदेश), सदस्य-शासी परिषद् , केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा रहे। सान्निध्य एवं मार्गदर्शन केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा की यशस्वी निदेशक प्रो. बीना शर्मा ने किया एवं सभी अतिथियों का स्वागत परिचय एवं बीज वक्तव्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने किया एवं कार्यक्रम परिचय एवं संचालन डाॅ. दिग्विजय कुमार शर्मा ने किया।

इस अवसर पर प्रो. उमापति दीक्षित, विभागाध्यक्ष, नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग ने अतिथियों का स्वागत वक्तव्य देते हुए बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया और कहा कि इस आॅनलाइन समापन कार्यक्रम समारोह में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, गंगटोक एवं गेजिंग के सभी विद्यार्थियों का स्वागत है। हम सभी के लिए यह बहुत ही गर्व की बात है कि हमारे बीच दो नहीं बल्कि तीन साहित्य मर्मज्ञ उपस्थित हैं। इस क्रम में मैं निदेशक महोदया की भी प्रशंसा करता हूँ कि उनके निर्देशन एवं मार्गदर्शन में हम हिंदी भाषा संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम चला रहे हैं।
इस कार्यक्रम में गंगटोक से सीनियर लेक्चरर मनीता खनल एवं गेजिंग से सीनियर लेक्चरर कुलदीप शर्मा (सिक्किम) के दिशा निदेर्शन में सभी प्रतिभागी पंजीकृृत होकर लभान्वित हुए एवं कुछ प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण से संबंधित अपने-अपने अनुभव एवं विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. गिरिराजशरण अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम जिसमें हिंदी भाषा संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम जैसे कोर्स चलाए जा रहे हैं। आयोजकों को बधाई और धन्यवाद कि पूर्वोत्तर भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार को बल मिलेगा। जब पूर्वोत्तर के विद्यार्थी हिंदी का उच्चारण करते हैं वो बहुत ही प्रशंसनीय होता है। प्रायः लेखन में व्याकरणीक त्रुटियाँ होती है लेकिन इसके बावजूद भी हिंदी के प्रसार को बल मिलता है। आज विदेशों में भी लोग फिल्मों के द्वारा हिंदी भाषा में फिल्म को डब करके भारत में प्रदर्शित करते हैं। जिससे पैसा कमाया जाता है और विदेशों में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार होता है। हमारी हिंदी भाषावैज्ञानिक भाषा है। जैसा हम बोलते हैं वैसा ही लिखते हैं। लेखन की दृृष्टि से लोग बहुत सी त्रुटियां करते हैं, इसके बावजूद भी हमारी हिंदी मजबूत हो रही है। हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा एवं हमारे मन की भाषा है। हिंदी में बहुत-सी पुस्तकों की वेबसाइट हैं। जिन पर जाकर हम हिंदी की पुस्तकें पढ़ सकते हैं। आज सबसे महत्वपूर्ण बात है कि गूगल सर्च इंजन पर हिंदी भाषा से संबंधित कई पुस्तकें खोज सकते हैं। इसके अलावा आप इंटरनेट के द्वारा अपनी बात को भी यू-ट्यूब, फेसबुक, मैसेंजर और वाट््सप के द्वारा भी अपनी बात प्रेषित कर सकते हैं। इन सभी तकनीकी उपकारणों के द्वारा नवीकरण से जुड़े विद्यार्थी अपनी मानक वर्तनी को भी सुधार सकते हैं।
सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्रो. बीना शर्मा, निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा ने कहा कि 22 फरवरी से गंगटोक एवं गेजिंग के विद्यार्थियों ने आॅनलाइन हिंदी भाषा शिक्षण का लाभ लिया है। जिसका समापन आज 05.03.2021 को हो रहा है। यह औपचारिक रूप से समापन हो रहा है लेकिन यह विद्या का क्रम आपके जीवन में निरंतर चलाता रहे। आपके द्वारा प्राप्त शिक्षा आपके जीवन में सकारात्मक साबित हो। हमने जीवन में जो कुछ सीखा है उसको जीवन में उतारने की आवश्यकता है। जिस प्रकार प्यासे कौवे की कहानी हमें समय के अनुसार जीना सिखाती है। हमारे द्वारा सीखी गई बातें जीवन में लाभदायक सिद्ध हों यही मेरी सभी विद्यार्थियों के लिए शुभकामना है।
अध्यक्षता कर रहे प्रो. नारायण कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि सबसे पहले संसार में एक भाषा थी और लोगों ने सोचा कि हम सीढ़ी के द्वारा इंद्र भगवान तक पहुंच सकते हैं। जब एक भाषा के द्वारा लोग इंद्र तक पहुंचे तो इंद्र ने नाराज होकर अभिशाप दिया कि आप सभी लोगों की भाषाएं अलग-अलग हो जाएंगी जिसके कारण आज सभी लोग अलग-अलग भाषाओं में बात करते हैं।
मैं प्रशिक्षणाार्थियों को बताना चाहता हूँ कि हमारी हिंदी भाषा को भारत सरकार द्वारा राजभाषा की मान्यता प्रदान की गई है। हिंदी हम सब के मध्य जोड़ने का कार्य कर रही है। मेरा अनुरोध है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा इस प्रकार के कार्यक्रमों को चलाकर हिंदी को अधिक से अधिक व्यवहारिक बना सके। भाषा और अग्नि का जब आविष्कार हुआ तो इन दोनों को जीवंत रखना आवश्यक हो गया। अतः हमको भाषा के महत्व को समझना चाहिए और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को किस प्रकार आगे बढ़ाया जा सकता है। इस दिशा में एकजुट होकर कार्यक्रम करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर आॅनलाइन समापन कार्यक्रम समारोह के दौरान डाॅ. परमान सिंह, डाॅ. रंजन कुमार दास, प्रमोद पाठक, निर्मल कुमार सिन्हा, अनिल कुमार शर्मा तथा संस्थान के समस्त सदस्य आॅनलाइन वेबेक्स मीटिंग लिंक के माध्यम से उपस्थित रहे।

डाॅ. दिग्विजय कुमार शर्मा
सह- संयोजक
नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग

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