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आगरा के साथ प्रदेश के उद्योग-धन्धों का क्या होगा???

आज सोशल मीडिया पर समाचार मिल रहे हैं कि आगरा में कोरोना पोजिटिव की संख्या 425 हो गयी है, सच है या नहीं, लेकिन कल तक 401 बताया जा रही थी, यह तो सच था।

लेकिन संख्या 425 हो 401 हो, क्या कहा जाए, शासन-प्रशासन को बधाई दी जाए या शोक व्यक्त करें, और मनन करें कि प्रचारित आगरा माॅडन कितना सफल हुआ? प्रश्न यह भी उठ रहा है कि रोकथाम में प्रशासन की सफलता कहा जाए या असफलता? यह तो प्रशासन ही बता पाएगा। लेकिन इस बीच जनमानस में प्रश्न उभर कर आ रहा है कि 25 मार्च को प्रारम्भ हुआ लाॅकडाउन का प्रथम चरण और 15 मई शुरु हुआ दूसरा चरण, और उसके बाद कोरोना के रोकथाम हेतु प्रशासन द्वारा कड़े कदम उठाये गये, शहरभर में जनता जनार्दन को दैनिक वस्तुओं का अभाव को झेलना पड़ रहा है। इस कड़े ओर अस्वाभाविक लाॅकडाउन के चलते विश्व पयर्टन केन्द्र और निर्यात सेक्टर में अपनी महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला आगरा का उद्योग-व्यापार की स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि आगरा एक विश्व स्तरीय पयर्टन क्षेत्र होने के साथ विभिन्न उद्योगांे का केन्द्र है, जिसमें प्रमुख होटल एवं पयर्टन, टैक्सी उद्योग, जूता निर्यात और देश में आपूर्ति, डीजल एवं फांउड्री उद्योग, ज्वैलरी, बुलियन उद्योग, किराना, पेठा और मिठाई उद्योग, प्रकाशन उद्योग के साथ एमएसएमई, एसएमई उद्योग के साथ सरकारी विभागों में आपूर्ति के उद्योग क्षेत्र में भारी नुकसान का आंकलन किया जा रहा है, आगरा की गैर-राजनीतिक व्यापारिक संगठन नेशनल चैम्बर आॅफ इंडस्ट्ररज एंड काॅमर्स के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल द्वारा एडीशनल कमिश्नर ग्रेड-1 आगरा को भेजे पत्र में आंकलन करते हुए कहा है कि आगरा के प्रमुख होटल पयर्टन उद्योग क्षेत्र में 3000 करोड़, टैक्सी उद्योग 1500 करोड़, जूता निर्यात 5000 करोड़ और देश में आपूर्ति, डीजल एवं फाउड्री उद्योग में 500 करोड़, ज्वैलरी व बुलियन उद्योग 200 करोड़, किराना, पेठा और मिठाई उद्योग 20 करोड़, इलैक्ट्रानिक उद्योग 100 करोड़, प्रकाशन उद्योग के साथ एमएसएमई, एसएमई उद्योग के साथ सरकारी विभागों में आपूर्ति के उद्योग क्षेत्र में बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है।

अब आप स्वयं की सोचों कि जब आगरा के उद्योगों की स्थिति यह होगी तो पूरे प्रदेश की स्थिति क्या होगी? और देश के उद्योगों की क्या होगी।
जैसा स्थिति आगरा की बनी हुई है कि आज 425 कोरोना पोजिटिव केस सामने आ चुके हैं, जबकि अभी गति रुकी नहीं है, ऐसे ही प्रदेश के रेड जोन में शामिल शहरों व जनपदों में लागू लाॅकडाउन खुलने की आशा करना व्यथ ही है। कहा नहीं जा सकता कि कब तक मरीजों की संख्या पर रोक लग जाएगी और कब उद्योग-धन्धे शुरु होंगे। ऐसी ही एक बात यह भी समझ में नहीं आ रही है कि आगरा में लागू लाॅकडाउन कब तक खुलेगा?
लेकिन इस सबके साथ अब आगरा के साथ प्रदेश के उद्योग व व्यापारी वर्ग के मन में यह प्रश्न उभरने लगा है कि भविष्य में कैसे अपने उद्योग व व्यापार को कैसे संभालेंगे। चंूकि शासन-प्रशासन से उद्योग व्यापार उभारने की आशा की जाने बेमानी ही होगी क्योंकि लाॅकडाउन तक तो ठीक है लेकिन खुलते ही व्यापारिक वसूली प्रारम्भ हो जाएगी, तो उद्योगपति और व्यापारी वर्ग कहां भुगतान करेगा। लाॅकडाउन खुलते ही प्रशासन भूल जाएगा कि प्रदेश के साथ आगरा उद्योगों की क्या हालत है बस सभी को वसूली का विभागीय लक्ष्य दिखायी पड़ेगा। और शासन भी लक्ष्य पूरा करने को दवाब डालने नहीं चूकेगा।

अब यह निश्चित हो चुका है कि केन्द्र सरकार या राज्य सरकार उद्योग और व्यापार को पुनः उभरने के लिए कोई सहायता देने को राजी नहीं है क्योंकि लाॅकडाउन लगे 35 दिन हो चुके हैं लेकिन आज तक सरकार की ओर से कोई राहत अथवा प्रोत्साहन पैकेज के लिए इशारा नहीं मिल रहा है। या यह मानकर चला जाए कि देश के उद्योग और व्यापार केवल टैक्स भरने के लिए ही है, इस वर्ग को सरकार से कोई राहत अथवा प्रोत्साहन पैकेज की आशा नहीं करनी चाहिए।

पराग सिंहल
महासचिव
एसोसिएशन आॅफ टैक्स पेयर्स एंड प्रोफेशनल्स

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