लेख साहित्य

भगवान बुद्ध”

वैसाखी की पूर्णिमा, हुए अवतरित बुद्ध।
तप कर वो तपते रहे, करने तन-मन शुद्ध।।1
राज-पाट को त्याग कर, धर संन्यासी वेश।
घूम-घूम देते रहे, प्रेम-शांति सन्देश।।2
बोधि वृक्ष तल बैठ कर, जाना जीवन मर्म।
सोच बदलने को किया, स्थापित नव धर्म।।3
सुखमय जीवन राह में, बिखरे अगणित शूल।
सत्य, अहिंसा त्याग ही, जीवन के हैं मूल।।4
हाथ अगर इक दीप है, उससे जले हजार।
ज्ञान दीप सबसे बड़ा, मन तम करे प्रहार।।5

कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव, 26 मई 2021

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