लेख साहित्य

जमीर और कालाबाजारी

कोरोना महामारी के चलते रहना चारदीवारी है।
धंधा सारा चौपट हो गया हाय ये कैसी बीमारी है।

तमाम ऊँचे घराने के लोग काला धंधा कर रहे
बीमारी से ग्रसित लोगों के जज्बातों से खेल रहे
जमीर बेचकर धन कमा रहे ये कैसी भ्रष्टाचारी है
धंधा सारा चौपट हो गया हाय ये कैसी बीमारी है।

मर चुकी इंसानियत इनकी मरीजों पर तरस न आवे
जेब भरी हुई है इनकी फिर भी मरीजों से नोट कमावे
दवाई,इंजेक्शन,ऑक्सीजन की कर रहे कालाबाजारी है
धंधा सारा चौपट हो गया हाय ये कैसी बीमारी है।

कुछ लोग है जो मानवता को तार-तार कर रहे
बेड दिलाने के नाम पर लोगों को सरेआम लूट रहे
मुर्दों पर भी लाखों का बिल भुगतान करना जारी है
धंधा सारा चौपट हो गया हाय ये कैसी बीमारी है।

बहुत लोग ऐसे भी है जो मानव सेवा कर रहे
कमाई का जरिया बंद हुआ मुश्किल से पेट भर रहे
उनके घर में राशन का सामान भेजना जिम्मेदारी है
धंधा सारा चौपट हो गया हाय ये कैसी बीमारी है।

सुमन अग्रवाल “सागरिका”
आगरा

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