लेख साहित्य

पर्यावरण दिवस पर मंगलमयी शुभकामनाओं के साथ वृक्षारोपण से लाभ विषय पर सृजित दोहेः

पीपल तुलसी नीम से, सदा मिले नव प्राण।
इससे प्रीत बढ़ाइए, इससे ही कल्याण।।

बरगद पीपल छाँव में, रोग भगें सब दूर।
हरियाली इनसे मिले, प्राणवायु भरपूर।।

प्राणवायु जब शुद्ध हो, मानस हो स्फूर्त।
प्राण प्रदाता पेड़ को, मानों ईश्वर मूर्त।।

वृक्ष कभी मत काटिए, हे! स्वार्थी इंसान।
प्राण वायु इनसे मिले, इनसे स्वस्थ्य जहान।।

घर में जितने पुत्र हों, उतने वृक्ष लगाव।
बिटिया के शुभ नाम पर, तुलसी आँगन लाव।।

बहुएँ जब संतति जनें, तब- तब वृक्ष लगाव।
इससे तेरा नाम हो, रहे न प्राण अभाव।।

दिखे भूमि खाली जहाँ , वहीं डालिए बीज।
वृक्षारोपण कीजिए, तभी सुहागन तीज।।

पाल पोष कर वृक्ष को, बड़ा करो हे! तात।
इससे अच्छा धर्म नहिं, इससे सदा प्रभात।।

यारो वृक्ष लगाइए, साथ संग महबूब ।
जीवन होगा दूब सम, खुशियाँ भी हो खूब ॥

वृक्ष हमें दें फल मधुर, अरु पीने को नीर।
मृदा क्षरण को रोकते, रखते शुद्ध समीर।।

पादप को नित पालिये, पादप पूत समान।
पादप सेवन स्वास्थ्य मय, धरती के वरदान।।

प्रकृति हमारी शान है, प्रकृति हमारी जान।
इसको सभी बचाइए, इससे सभी निदान।।

कर्त्तव्यों से हम जुड़ें, भूलें निज अधिकार।
इससे ही अति प्रेम हो, इससे सद्- व्यवहार।।

रचनाकार
पं रामजस त्रिपाठी नारायण
भुआलपुर चुनारगढ़ उ प्र

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