लेख साहित्य

सावित्री मां

सावित्री माँ की कथा, लिखी हुई इतिहास।
वट पूजा के नाम से,जानें इसको खास।

मद्रदेश में नृप हुआ, अश्वपती था नाम।
उनकी सावित्री सुता, रहती सुंदर धाम।
दिन – दिन बढ़ स्यानी हुई,वर को पिता उदास।
सावित्री माँ की कथा, लिखी हुई इतिहास।

चुनें लाड़िलीली स्वयंवर, बात कही नृप राज।
पूर्ण मुझे विश्वास है, सफल करें प्रभु काज।
कुछ दिवसों के बाद में, पूरा हुआ प्रयास।
सावित्री माँ की कथा, लिखी हुई इतिहास।

शाल्वदेश सुकुमार को, कीन्हाँ पति स्वीकार।
नारद ऋषि को बुला नृप, दिखा रहे दिन वार।
एक वर्ष की आयु है, सत्यवान के पास।
सावित्री माँ की कथा, लिखी हुई इतिहास।

सावित्री ने सुन कहा, सत्य मान ली बात।
प्रभु को साक्षी मानकर, करो कार्य शुभ तात।
मेरा पति सौ साल तक, जिए लगाऊँ आस।
सावित्री मां की कथा, लिखी हुई इतिहास।

नारद मुनि के कथन का, दिन आया नजदीक।
सत्यवान कहने लगे, तबीयत दिखे न ठीक।
सावित्री को हो गया, धर्मराज आभास।
सावित्री मां की कथा, लिखी हुई इतिहास।

घोर तपस्या वृत किया, पति की रक्षा हेतु।
प्राण बचा पतिदेव की, गढ़ा जगत में केतु।
सती वृता गदगद हुईं, मृत्यु न आई पास।
सावित्री माँ की कथा, लिखी हुई इतिहास।

प्रेम सिंह राजावत ‘प्रेम’
(धिमश्री)
१३ बी रश्मि विहार कालोनी शमशाबाद रोड आगरा-

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