नई दिल्ली

आरोपों से घिरा ट्रस्ट ने दी सफाई और केंद्र को भेजी रिपोर्ट, विपक्ष जांच कराने पर अड़ा

इंडिया समाचार 24
शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर को लेकर पहले भी भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीति गर्म होती रही है। अब एक बार फिर से अयोध्या में भूमि घोटाले पर ‘सियासी घमासान’ मचा हुआ है। अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ‘हिंदुओं की आस्था’ को जोड़ते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का ‘मुद्दा’ भी बनाने जा रही है। वहीं अयोध्या में भूमि घोटाले को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेता पूरे मामले की जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। विपक्षी पार्टियों ने इसे करोड़ों लोगों की आस्था से धोखा करार दिया है और ट्रस्ट के सदस्यों से ‘इस्तीफा’ मांगा है। वहीं दूसरी ओर सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने अयोध्‍या के निर्माणाधीन राम मंदिर की जमीन खरीद से जुड़े विवाद पर जिले के अधिकारियों से पूरा ब्‍योरा मांगा। अयोध्या में भूमि घोटालेे पर लखनऊ से दिल्ली तक राजनीति ‘गर्म’ है। इस बीच मंगलवार दोपहर को विपक्ष के निशाने पर घिरा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सफाई पेश करते हुए पूरे मामले की ‘रिपोर्ट’ जारी की है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपना बयान जारी कर इन आरोपों का ‘खंडन’ किया है। ट्रस्ट ने कहा कि जो आरोप लगे हैं वो राजनीतिक हैं, जिनसे जमीन खरीदी गई है, उनसे काफी पहले की डीलिंग हुई है, क्योंकि अभी जमीनों के दाम ज्यादा हैं, ऐसे में इतने दाम में ये ली गई है। ‘ट्रस्ट का दावा है कि अभी भी मार्केट रेट से कम दाम पर खरीद हुई है’। ट्रस्ट की ओर से रिपोर्ट में कहा गया कि राम मंदिर से जुड़ी जमीन खरीद में घोटाले के आरोप भाजपा विरोधी पार्टियां लगा रही हैं। ट्रस्ट ने इसके साथ ही जमीन से जुड़े कुछ तथ्य भी दिए। तथ्यों में ट्रस्ट की ओर से दावा किया गया कि मंदिर जो जमीन खरीदी गई है वो प्राइम लोकेशन पर है, जिसकी वजह से उसके रेट अधिक हैं। खरीदी गई जमीन का रेट 1423 प्रति स्क्वायर फीट है। ट्रस्ट ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसको विपक्षी पार्टियों की ‘साजिश’ करार दिया है। ट्रस्ट ने यह रिपोर्ट केंद्र के अलावा भाजपा और आरएसएस को भी भेजी है। इस रिपोर्ट में जमीन खरीद संबंधी सभी जानकारी पूरे विस्तार के साथ दी गई है। इसके साथ ही यह भी समझाया गया कि इसके रेट अलग-अलग क्यों और कैसे हैं? बता दें कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन पर सवाल उठाए गए हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उसकी जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की है। संजय सिंह ने लखनऊ में दावा किया था कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने संस्था के सदस्य अनिल मिश्रा की मदद से दो करोड़ रुपये कीमत की जमीन 18 करोड़ रुपये में खरीदी। उन्होंने कहा था कि यह सीधे-सीधे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है और सरकार इसकी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराए । ‘सांसद संजय सिंह ने मंगलवार को भाजपा समर्थकों द्वारा दिल्ली स्थित अपने आवास पर हमला करने का आरोप लगाया’। उन्होंने कहा कि राम मंदिर न्यास की ओर से अयोध्या में जमीन खरीद मामले में कथित भ्रष्टाचार का खुलासा करने की वजह से भाजपा के समर्थकों ने उनके घर पर हमला किया है। दिल्ली स्थित नॉर्थ एवेन्यू इलाके में दो लोगों ने सिंह के घर की नेमप्लेट पर कालिख पोतकर काला कर दिया और परिसर में जबरन घुसने की कोशिश की। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय पवन ने ट्रस्ट पर जमीन खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दो करोड़ रुपये में बैनामा कराई गई जमीन को 10 मिनट के अंदर 18.50 करोड़ रुपये में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर दिया गया। पूर्व मंत्री पवन ने पूरे मामले में दस्तावेज पेश करते हुए इसकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। भले ही श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट ने अयोध्या भूमि घोटाले की सफाई और रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है लेकिन फिलहाल विपक्षी दल इस मुद्दे को शांत नहीं होने देंगे।

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