लेख साहित्य

“खामोशी को गले लगाना और सुनना”

अपने होंठों से मेरा नाम बुलाना और सुनना..!
मेरी खामोशी को गले लगाना और सुनना….!!

जो रूह को महसूस हो उसे प्रेम कहते हैं..!
होंठों में यही आवाज दबाना और सुनना…….!!

नूर सा निखरता था जब देख तुझे चेहरा उसका!
उस तस्वीर पर तब कान लगाना और सुनना !!

आशिक़ी पर तेरे मर मिटी जो ये कलम उसकी..!
ऩज़रों से कभी उसको सहलाना और सुनना….!!

धड़कन धड़कन..रूसवा हुई जो तेरी खामोशी से,
सुनो..उस कर्ज का हिसाब लगाना और सुनना !!

फक़त गुमान खातिर..ठुकरा दिया जिस रिश्ते को,
वक्त के उस आइने में लम्हा बिताना और सुनना !!

किरण मिश्रा ‘स्वयंसिद्धा’
नोयडा

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