लेख साहित्य

लघु आलेख – जल है तो जीवन है

मित्रों सादर वंदे

मित्रो रहीम दास जी ने बहुत पहले कहा था कि,

रहिमन पानी राखिए, बिन सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।

क्या इस बात पर किसी ने अमल किया, कि पानी की समस्या क्यों हो रही है। भूजल स्तर क्यों नीचे जा रहा है। आगे समस्या से कैसे बचा जा सकता है। सरकार से लेकर नीचे की इकाई तक इस विषय पर विशेष गहन चिंतन करना चाहिए। एक नारा मुझे याद आ रहा है रोटी कपड़ा और मकान, जीवन के हैं तीन निशान परंतु इसमें पानी तो सब का बाप है, इस मुख्य समस्या पर किसी का ध्यान नहीं गया न ही जा रहा है। पानी नहीं होगा तो रोटी भी नहीं होगी।रोटी भी अन्न से बनती है अन्न उगाने के लिए पानी चाहिए, मकान बनाने के लिए पानी चाहिए, बिना पानी के मकान नहीं बन पाएगा, और कपड़े भी नहीं बन सकते। अर्थात सारी समस्याओं का निदान पानी के बिना नहींं हो सकता है। और इस दौर पानी का दोहन किस कदर हो रहा है, इसको हम सब जानते हैं, आगे आने वाली पीढ़ी के लिए हम क्या छोड़कर जाएंगे, आज हरियाली काट कर जगह जगह नई कालोनियाँ बसाई जा रही हैं। परंतु उनमें भी पानी है इंतजाम नहीं है। जितने मकान बने हैं उतनी समर्सिबल हैं। आखिरकार पानी कहांँ से आए, जहाँ एक लोटे की जरूरत है, वहां 20 बाल्टी पानी खर्च हो रहा है। नीचे जमीन पूरी खोखली हो गई है। हम मौत के कुएं पर मकान बनाए हुए हैं। एक दिन ऐसा आएगा कि सभी मकान जमीन में समा जाएंगे। जो बचेंगे वह देखती रह जाएंगे। प्रकृति के साथ खिलवाड़ अच्छा नहीं है। हमें पानी का दोहन रोक देना चाहिए। सरकार को चाहिए कि कॉलोनी बनाने से पहले पानी का अच्छा इंतजाम करै जहांँ से सभी को पानी की सप्लाई समय-समय पर हो सके। तो जीवन पुन: खुशाहाल हो जाएगा। एवं पानी की बर्बादी भी रुकेगी।
जल है तो जीवन है

प्रेमसिंह राजावत ‘प्रेम”आगरा

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