लेख साहित्य

कारवां गुजर गया -महाकवि गोपालदास नीरज की पुण्यतिथि पर विशेष

महाकवि गोपालदास नीरज बेशक हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन दिलों में सदा रहेंगे। उनकी जिंदगी से जुड़े तमाम गीत, कविताएं हैं, जो लोगों की जुबां पर आज भी रहते हैं। प्रशंसक उन्हें गुनगुनाते रहते हैं। बेशक उन्होंने मायानगरी में कम समय दिया हो, लेकिन फिल्मों में उनके लिखे गीत अमर हो गए। उनमें से कुछ गीत-कविताएं ऐसे भी हैं, जिन्होंने कवि नीरज को बुलंदी तक पहुंचाया। कारवां गुजर गया, उनकी कालजयी कविता है, जिसे उनकी पहली फिल्म नई उम्र की नई फसल में मोहम्मद रफी ने आवाज दी। इसके बाद नीरज का कारवां फिल्मी दुनिया में बढ़ता ही गया। एक गीत पर मशहूर संगीतकार शंकर-जय किशन काफी प्रभावित हुए। फिल्म कन्यादान के मशहूर गीत लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में के लिए निर्देशक राजेंद्र भाटिया ने नई गाड़ी गिफ्ट दे दी थी।

60 के दशक में आई थी नई उम्र की नई फसल :
महाकवि के प्रशंसक अनिल वर्मा ने बताया कि 60 के दशक में आई फिल्म नई उम्र की नई फसल के लिए नीरजजी की कालजयी कवित कारवां गुजर गया, गुबार देखते रह गए को मोहम्मद रफी ने गाया था। इस फिल्म का काफी भाग व गाना एएमयू में शूट हुआ था। इस गीत ने नीरजजी को फिल्मी
दुनिया में काफी पहचान दिलाई थी।

फिल्म कन्यादान के लिए नीरज ने कहा था,5 मिनट में कितने गाने लिखने हैं :
फिल्म कन्यादान से जुड़ा भी एक यादगार वाक्या है। 1968 का वह दौर था। दरअसल फिल्म कन्यादान की शूटिंग पूर हो चुकी थी, लेकिन निर्देशक एक गीत ऐसा चाहते थे, जो सुनते ही दिलो-दिमाग पर छा जाए। फिल्म में संगीत शंकर-जय किशन ने दिया था। उन्हें जो गाना दिया गया वह पसंद नहीं आया। संगीतकार जयकिशन कवि नीरज को काफी पसंद किया करते थे। क्योंकि नीरज चंदा और बिजली फिल्म में गीत लिख चुके थे। इसलिए पहले से पहचान थी। उन्हें पता था कि कन्यादान के लिए भी नीरज बेहतरीन गीत लिखेंगे। कवि नीरज के बेटे गुंजन नीरज ने बताया कि बाबूजी बताते थे कि संगीतकार जयकिशन ने पांच मिनट का समय दिया और कहा कि गाना लिखना है, गाड़ी इनाम में दी जाएगी। इस पर बाबूजी का जवाब था कि पांच मिनट में कितने गाने तैयार करने हैं तो निर्देशक हंसकर बोले कि आप एक ही लिख दीजिए। तो नीरजजी ने पांच मिनट का एकांतवास मांगा और फिर गीत लिखा, लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में।

गीत पर दी थी लाल गाड़ी :
लिखे जो खत तुझे गीत की पंक्तियां सुनकर शंकर-जयकिशन खुशी से उछल पड़े। बोले, लाजवाब लिखा है, तुमने तो कमाल कर दिया। फिल्म के निर्देशक राजेंद्र भाटिया ने पूछा तुम्हें जो कुछ मांगना हो मांग लो, आज तो तुमने वाकई दिल जीत लिया। नीरज ने कहा कि उनके पास गाड़ी नहीं है। निर्देशक ने तुरंत अपनी नई गाड़ी की चाभी थमा दी। कहा, आज से यह कार तुम्हारी है। गाने में भी वह कार दिखाई देती है। शशि कपूर कार के पास खड़े गीत गुनगुनाते दिखते हैं।
अलीगढ़ में भी वो गाड़ी नीरज के बेटे मिलन प्रभात गुंजन ने खूब दौड़ाई। खासबात है कि फिल्म के गीत में भी शशि कपूर के साथ गाड़ी दिखाई गई है। चार दिसंबर को शशि कपूर के पुण्यतिथि पर वह वाकया एक बार फिर बरबस याद आ गया। महाकवि गोपालदास नीरज का फिल्मी दुनिया में गीत लिखने का सिलिसला 1965 के करीब प्रारंभ हो गया था। प्रसिद्ध गीतकार के रुप में वह स्थापित होने लगे थे। वर्ष 1968 में बनी फिल्म कन्यादान में उन्हें गीत लिखने का मौका मिला।

नीरजजी की तमन्ना थी कि जब उनकी शवयात्रा निकले तो उनके मशहूर गीतों को बजाया जाए। तो शवयात्रा के समय उनके गीतों गुनगुनाकर संगीतमय श्रद्धांजलि दी थी। उनका गीत कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे, हर कार्यक्रम में जरूर गुनगुनाता हूं।
-अनिल वर्मा, संगीतकार व प्रशंसक।

लिखे जो खत तुझे के लिए मिली गाड़ी को पिताजी 1972 में अलीगढ़ लेकर आए थे। उस समय एएमयू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई चल रही थी। तब कार से एएमयू जाया करते थे। अलीगढ़ में भी उसी कार से घूमते थे। 1977 में उत्तराखंड में नौकरी लग गई तो वो कार को वहां ले गए।
-गुंजन नीरज, पुत्र महाकवि नीरज।

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