लेख साहित्य

कह-मुकरी

इधर उधर वह घूम रहा है।
मस्ती में वह झूम रहा है।।
बहुत सताता रात रातभर।
का सखि साजन ?
नहिं सखि मच्छर।।
——–
उसे देखकर खुश हो जाती।
मीठे सपनों में खो जाती।।
कर देती मैं तन मन अर्पण।
का सखि साजन ?
नहिं सखि दर्पण।।
——–
उलट पलट कर पहले देखा।
लगा नापने सीमा रेखा।।
फिर वह पूछे मेरी मर्जी।
का सखि साजन ?
नहिं सखि दर्जी।।
———
बचपन हरा जवानी लाल।
वो कर दे मुझको बेहाल।।
तीखी-तीखी उसकी चर्चा।
का सखि साजन ?
नहिं सखि मिर्चा।।

नीता अवस्थी (उन्नाव)

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