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खंदौली में विजय दिवस पर याद किये शहीद धर्मवीर सिंह

आगरा। आज ही के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देकर कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। जिसके बाद से आज के दिन को हर भारतवासी विजय दिवस के रूप में मनाता है। कारगिल युद्ध लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई को उसका अंत भारत की विजय के साथ हुआ। इस विजय को पाने के लिए देश के कई वीर सपूतों ने अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये। करगिल विजय दिवस पर आज हर व्यक्ति उन वीर सपूतों को नमन कर रहा है। आज भी इस दिन को याद करके उन परिवार के लोगों की आँखों मे आंसू आ जाते है जिन्होंने इस युद्ध में अपने बेटे, भाई व पिता व पति को खोया है।

ऐसे ही एक जवान जो खंदौली क्षेत्र के गांव मलूपुर निवासी धर्मवीर सिंह थे वो जब कारगिल युद्ध के समय अविवाहित थे। जब युद्ध शुरू हुआ तो धर्मवीर नापाक दुश्मनों से मातृभूमि की रक्षा में सीना तान खड़े हो गए। 30 मई 1999 को जबर्दस्त लड़ाई हुई। वह बेहद बहादुरी से लड़े और लड़ते-लड़ते शहीद हो गए।

आज उनका पूरा परिवार उनकी तस्वीर को हाथों में थामे हुए उन्हें याद कर रहा है। शहीद की बूढ़ी माँ आज भी अपने बेटे की तस्वीर निहारती रहती है और उन पलों को याद करने पर आंखों से बहते आंसू थमते नहीं है।

शहीद धर्मवीर की माँ श्रीमती देवी बताती है कि 22 साल की उम्र में ही धर्मवीर देश सेवा करते हुए कारगिल युद्ध मे शहीद हो गया। उसकी शहादत पर उन्हें गर्व है लेकिन आज भी बेटा बहुत याद आता है। शहीद की माँ का कहना है कि छोटा बेटा भी फौज में जाने की तैयारी कर रहा था लेकिन करंट लगने से उसकी भी मौत हो गयी। आज उनका एक भी बेटा जीवित नहीं है और वो छोटे बेटे की बहू व पोते के साथ रहती है। उन्होंने बताया कि देश सेवा का जज्बा बेटे को खोकर भी कम नहीं हुआ है। छोटा बेटा भले ही फौज में न जा सका हो लेकिन उसका बेटा अपने ताऊ की तरह ही फ़ौज में भर्ती होना चाहता है और देश की सेवा करना चाहता है और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहता है।

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