लेख साहित्य

“मन दियना जले”

मन दियना जले
अँसुअन प्रीत पले !!

दिल की नाचे मयूरी
रंग अंग भर सिंदूरी..
राधे पनघट चली…
धीरे धीरे शाम ढले…..
मन दियना जले……
अँसुअन प्रीति पले…!!

मधुवन बाजे मृदंग
पुलकित गोपियन संग
कृष्णा….रास रचे
अधरन …वेणु धरे…
मन दियना जले..!!
अँसुअन प्रीति पले !!

राधा होके अधीर
ढूँढें जमुना के तीर
धीर मन न धरे…
नीर नैनन बहे……
मन दियना जले
अँसुअन प्रीत पले.. !!

मांग सूनी मेरी…
सूनी दोनो कलाई
मेंहदी…रोती फिरे
पायल देती दुहाई…
कैसा निष्ठुर प्रिये….
तोड़ वादा दिये…..!!

मन दियना जले
अँसुअन प्रीत पले….!

किरण मिश्रा”स्वयंसिद्धा”
नोयडा

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