आगरा उत्तर प्रदेश शिक्षा

चेतना का न्यूरोबायलॉजिकल एवं न्यूरोकॉग्निटिव साइंस की प्रयोग धर्मिता से संबंध

आगरा। संस्कृत विभाग, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, दयालबाग आगरा में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, एआईसीटीई ,अटल अकैडमी प्रदत्त डेवलपिंग कॉन्शसनेस विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला के तीसरे दिन के प्रथम सत्र में डॉ आरत प्रत्यक्ष कालरा ,प्रिंसटन यूनिवर्सिटी ,न्यू जर्सी ,यूनाइटेड स्टेट्स ने न्यूरोबायोलॉजिकल एप्रोच टू कॉन्शसनेस विषय पर व्याख्यान दिया। दूसरे एवं तीसरे सत्र में प्रोफेसर ज्योति कुमार एवं डॉ पूजा साहनी, आईआईटी ,नई दिल्ली ने संयुक्त रूप से यौगिक न्यूरोसाइंस ऑफ कॉन्शसनेस एवं न्यूरोकॉग्निटिव मैकेनिज्म एंड एक्सपेरिमेंटल डिजाइन फॉर कॉन्शसनेस स्टडीज विषय पर व्याख्यान दिए। तीनों ही सत्रों में चेतना के वैज्ञानिक पक्ष पर ध्यान केंद्रित कराया गया । डॉ पूजा साहनी ने बताया कि प्रकृति के सान्निध्य में ही स्वयं को जानने का प्रयास करना चाहिए ।प्रोफेसर ज्योति कुमार ने न्यूरोसाइंस को समझाते हुए चेतना के वैज्ञानिक एवं दार्शनिक पक्षों पर ध्यान केंद्रित कराया।सत्र संचालन वी सर्वनन, भूतपूर्व निदेशक ,साइंस एंड टेक्नोलॉजी ,गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एवं ज्योति प्रकाश, शोधार्थी थियोलोजी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनीता ,सहायक आचार्य ,संस्कृत विभाग ,डीईआई ने किया। कार्यक्रम संयोजिका डॉ निशीथ गौड़ ने फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के विभिन्न सत्रों के विषय पर जानकारी दी। इस पंच दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के 161 प्राध्यापक प्रतिभागिता प्रदान कर रहे हैं । इस अवसर पर ऑनलाइन माध्यम से प्रो अगम कुलश्रेष्ठ, प्रो मंजु भटनागर ,प्रो मीरा शर्मा ,डॉ पूजा ,डॉ नंदिनी,डॉ इंदु , डॉ शोभा भारद्वाज, डॉ लौलीन, डॉ नमस्या उपस्थित रहे एवं तकनीकी सहयोग,श्री गुरुकृपा एवं टी.प्रेम स्वरूप ने किया।

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