आगरा उत्तर प्रदेश कार्यक्रम

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से निर्यात के लिए खुल रहा वैश्विक बाजार..

आगरा। इस बार भारत सरकार ने निर्यात का लक्ष्य 400 बिलियन डॉलर रखा है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर राज्य में निर्यात सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
इस क्रम में शुक्रवार को आगरा-मथुरा हाईवे स्थित सींगना गांव स्थित आगरा ट्रेड सेंटर पर कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और सेंट्रल मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सहयोग से एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव आयोजित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि और डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने फीता काटकर कृषि के साथ विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी और दीप जलाकर सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया।
सम्मेलन में आगरा और बाहर से आए निर्यातकों, किसानों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की समस्याओं और सुझावों को सुनने के बाद श्री बीवीआर सुब्रमण्यम ने इस मौके पर अपने उद्बोधन में कहा कि विश्व में केवल कृषि ही नहीं, निर्यात और वाणिज्य के क्षेत्र में भी भारत की नंबर वन बनने की अपार संभावना है। कृषि के क्षेत्र में भारत सुपर पावर बन कर उभर सकता है लेकिन भारत को नंबर वन बनाने के लिए उत्तर प्रदेश को नंबर वन बनाना जरूरी है। उत्तर प्रदेश हर दृष्टि से संपन्न है। उत्तर प्रदेश में इतना उत्पादन होता है कि दुनिया की 50 फ़ीसदी आबादी को उत्तर प्रदेश खिला सकता है। अगर उत्तर प्रदेश के किसान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पेस्टिसाइड्स और केमिकल मुक्त खेती करें, अपने कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाएं और उत्पादों को अच्छी पैकिंग प्रदान करें तो निश्चित रूप से निर्यात ऊंचाई पर जा सकता है।
उन्होंने निर्यात बढ़ाने के लिए हर संभाग में टेस्टिंग सेंटर्स खुलवाने, स्टोरेज फैसिलिटी और पैक हाउसेस बढ़ाने के साथ हर तरह का सहयोग देने का वादा निर्यातकों और किसानों से किया।
उन्होंने बताया कि हम यूरोप, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और दुबई से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर रहे हैं। इनसे निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार खुल जाएगा।

वर्ल्ड एक्सपो में भाग लें यूपी के निर्यातक
वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव और यूपी के प्रभारी अनंत स्वरूप ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यूपी का निर्यात 84 हजार करोड़ से बढ़कर एक लाख 21 हजार करोड़ रुपए हो गया है। उत्तर प्रदेश जीडीपी में भी भारत का दूसरा अग्रणी राज्य है। लैंड लॉक्ड होने के बावजूद निर्यात के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पूरे देश में पांचवें स्थान पर है। उत्तर प्रदेश में आगरा का निर्यात लगभग 5 हजार करोड़ रुपए है और इसके तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के निर्यातकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे 10 दिसंबर से दुबई में आयोजित होने वाले वर्ल्ड एक्सपोर्ट कॉन्क्लेव में सहभागी बनें ताकि संसार के खरीदार उनके उत्पादों को देख सकें।

ऑर्गेनिक के नाम पर न भेजें केमिकल्स..
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव दिवाकर नाथ मिश्रा ने निर्यात बढ़ाने के लिए दो टूक कहा कि हम ऑर्गेनिक के नाम पर केमिकल्स भेजते हैं। देश का नाम खराब करते हैं। हमें ऑर्गेनिक्स की तरफ जाना होगा, तभी निर्यात बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि हम बेशक पेस्टिसाइड और केमिकल वाले फल और सब्जियां खा लें लेकिन विदेशों में इसे कोई खाने को तैयार नहीं। आज हमारी बासमती में वह खुशबू नहीं। हमें यह खुशबू वापस लानी होगी, तब हमारा निर्यात बढ़ेगा। इस दिशा में किसानों को जागरूक करना होगा। जब तक आप खाद पर निर्भर रहेंगे तब तक निर्यात नहीं बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि उत्पादन भले ही कम करें लेकिन गुणवत्ता युक्त करें। हमको अच्छी कृषि प्रैक्टिस अप्लाई करनी होगी। निर्यात के हिसाब से उत्पादन करना होगा। आलू की क्वालिटी पर ध्यान देना होगा तब वह प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त बन पाएगा। इस छोटे आलू से न तो अंकल चिप्स बन सकते हैं, न फिंगर चिप्स।
उन्होंने पैक हाउस और वेयरहाउस सहित एपीडा की तमाम योजनाओं का भी लाभ लेने की अपील करते हुए बताया की एपीडा की सारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

निर्यातकों की नई ब्रीड करें तैयार..
इंडियन काउंसिल ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन डॉक्टर एमजी खान ने सुझाव दिया कि निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमको निर्यातकों की नई प्रजाति तैयार करनी होगी। छोटे-छोटे उत्पादों के नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करना होगा। साथ ही तमिलनाडु की तर्ज पर प्रसीशन एग्रीकल्चर को प्रमोट करना होगा।

किसानों की आय बढ़ाना मकसद
एपीडा के चेयरमैन एम अंगामुथु ने कहा कि देश में जब उत्तर प्रदेश और भारत का निर्यात बढ़ेगा तो निश्चित रूप से भारत के अन्नदाता किसानों की आय भी बढ़ेगी और यही हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी का मुख्य मकसद है।

लद्दाख से सीखें निर्यात की कला
एपीडा के डायरेक्टर डॉ. तरुण बजाज ने सम्मेलन का संचालन किया और स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश संभावनाओं, विविधताओं और विशेषताओं का क्षेत्र है। निर्यात लक्ष्य में उत्तर प्रदेश का बड़ा योगदान है। यहां संभावना भी है और चुनौतियां भी। चुनौतियों का समाधान ढूंढते हुए हमें लक्ष्य तक पहुंचना है‌। उन्होंने लद्दाख में एप्रीकॉट के एक्सपोर्ट के नजीर पेश कर उत्तर प्रदेश में भी निर्यात को प्रोत्साहित करने की प्रेरणा दी।

टेक्सटाइल और लेदर के लिए बनाएं एक पॉलिसी
एफमेक के प्रेसिडेंट और प्रमुख उद्यमी पूरन डाबर ने टेक्सटाइल और लेदर के लिए एक मंत्रालय और एक पॉलिसी बनाए जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिला उद्योग कार्यालय में हमारी उद्योगों की सभी समस्याओं के निदान के लिए सिंगल विंडो होनी चाहिए।
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आर सेल्वम, फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण कुमार सिन्हा और आगरा के जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
सीएलई के चेयरमैन संजय लीखा, रीजनल चेयरमैन मोतीलाल सेठी, हैंडीक्राफ्ट उद्योग से रजत अस्थाना, हॉर्टिकल्चर के डायरेक्टर आरके तोमर, एपीडा की डीजीएम विनीता सुधांशु और क्षेत्रीय प्रभारी डॉ. सीबी सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
समापन पर एपीडा के साथ-साथ एक जिला एक उत्पाद पर डीजीएफटी, एमएसएमई विभाग, ईसीजीसी द्वारा एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स इंश्योरेंस, काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स द्वारा तकनीकी सत्र में विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त किए गए।

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