लेख साहित्य

त्योहारों की बहार

साहित्य अर्पण एक ऐसा मंच जिस पर सभी को अपने विचार व्यक्त करने के लिए अवसर प्रदान किया जाता है। त्योहारों के चलते तो इस मंच ने सभी को अपनी ओर आकर्षित किया। त्योहार जो भारत की शान कहे जाते हैं उसमें एक शानदार ‌आहुति इस मंच ने भी डाल दी।
इसके लिए साहित्य अर्पण की संस्थापिका आ० नेहा शर्मा जी जो दुबई में निवास करती हैं उन्हें भी अपने भारत के त्योहारों की याद खींच लाई। उनकी देखरेख में एक अनोखा कार्यक्रम पूरे हर्षोल्लास से चार दिनों तक अपनी रंगत बनाए रखने में कामयाब रहा। उनको व उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र हैं जिनके अथक प्रयासों से यह संभव हो सका। आ० पूनम बागड़िया जी, आ० नूतन गर्ग जी, आ० विनय गौतम जी, आ० दीप्ति शुक्ला जी और आ० संदीप कुमार जी व सभी साथी कलमकारों के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलता के परम शिखर तक पहुंच पाया।
साथी कलाकार जिन्होंने मंच की शोभा बढ़ाई वे इस प्रकार रहे…
अंजू छतवानी जी,भूपिंदर कौर जी, ज्योत्स्ना एम कपिल जी, ऊषा चौहान जी, पूनम तिवारी जी, मीरा जी, भारती सिंह जी, स्वाति सिंह जी, वंदना सिंह जी, सरला मेहता जी, सपना व्यास जी, अंजू जी, चंचल वशिष्ठ जी, लोकेश निर्वाल जी, नम्रता पांडेय जी, डॉ मंजू सिंह जी, प्रतिभा शर्मा जी, दीपेश गौर जी, विनीता लवानिया जी, राजेश पाण्डेय जी, सीमा खरे जी, मीरा शिंजनी जी, रुचि जी, इंद्रजीत दीक्षित जी, वर्षा पाण्डेय जी, भावना भारद्वाज जी, रेनू जी, प्रतिबिम्ब जी, नरेंद्र डग्गा जी, ऋषि रंजन जी, पायल गोईन्का जी, अरविंद भगानिया जी, गुरमीत सिंह जी, डॉ क्षमा सिसोदिया जी और इंदु मिश्रा जी।

कार्यक्रम इस प्रकार रहे…

3. नवंबर बुधवार को गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें सभी साथी कलाकारों ने अपने मधुर कंठ से समा बांध दिया। एक से बढ़कर एक गानों ने दिन को खूबसूरत बना दिया। 4 नवंबर को सेल्फी प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें त्योहारों के चलते भी सभी में उत्साह देखते ही बन पड़ रहा था। 5 नवंबर को रंगोली प्रतियोगिता हुई बच्चों ने भी इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुंदर रंगोलियों से मंच सुसज्जित था। जिसकी शोभा देखते ही बन रही थी। 6 नवंबर को भाई-बहन के प्यार को दर्शाते हुए आकर्षक फोटो से मंच सजा। चार दिनों तक लगातार चलने वाली प्रतियोगिताओं में सभी ने अपने-अपने कौशल से सभी को परिचित कराया।
वैसे तो साहित्य अर्पण रोज़ प्रतियोगिता आयोजित करता है परन्तु इन दिनों की बात ही निराली रही। त्योहारों के चलते भी सभी ने बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर इस अनोखे आयोजन को अनोखा करते हुए अपने चरम पर पंहुचा दिया।

इस प्रकार सुश्री नेहा शर्मा ‌जी के मार्गदर्शन में यह आयोजन बहुत ही समृद्ध ,सफल व उत्कृष्ट रहा।

नूतन गर्ग (दिल्ली)
साहित्य अर्पण

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