लेख साहित्य

वीर बिरसा मुंडा जी के जन्मदिवस की मंगलमय शुभकामनाएं

हमारी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने में सहायक,17 बिहार परिवार कल्याण अध्यक्षा डॉ पूजा अग्रवाल महोदया ने अति संज्ञान पूर्वक सूचित किया कि ,भारत सरकार ने देश की आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के शुभ अवसर पर हमारे जनजातीय वीर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, आदिवासी जननायक *बिरसा मुंडा जी के जन्म दिवस पर आज 15 नवंबर 21 को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निश्चय किया है।
निश्चित ही यह हमारे जनजातीय योद्धाओं के सम्मान का विषय है और इससे हमारी आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता संग्राम में प्रकृति से जुड़ाव रखने वाले वीरों के विलोपित योगदान को जान पाएंगी ।
आइए हम अपने पूर्वज वीर बिरसा मुंडा जी के विषय में जानते हैं।
देश की परतंत्रता के बीच 15 नवंबर1875 को बंगाल प्रेसीडेंसी छोटे नागपुर खूटी क्षेत्र (आज झारखंड) में बिरसा मुंडा जी का जन्म हुआ। बचपन से ही उनकी छवि सामाजिक सरोकारों से संबंध रखने वाली थी। आपने सन 1894 में अत्यधिक कृषि कर के विरोध में अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन किया जो अंग्रेजी सत्ता की नींव हिला दी। 2 वर्ष कारावास के पश्चात जब वे पुनः लौटे तो सशस्त्र विद्रोह कर दिए। जनजातीय योद्धाओं की गुरिल्ला युद्ध शैली ने फिरंगियों को हैरान कर दिया, उनकी तोपे नाकाम थी जनजातीय वीरों के तीर कमान, कुल्हाड़ी,तलवार बर्छी कटार के समक्ष।
इस प्रकार से वीर बिरसा मुंडा जी एवं अन्य जनजातीय योद्धा अंग्रेजी सरकार के लिए चुनौती बन गए थे। अंग्रेजों की नाक में दम कर दिए थे। पर दुख है कि किसी नमक हराम की नाकामी के चलते वे बंदी बना लिए गए।
अंग्रेजी सत्ता ने इनको कड़ी यातनाओं के साथ स्वीट प्वाइजन देना प्रारंभ किया, जिससे इस वीर का सन 1900 में लीला संवरण हो गया।

आज वो हमारी धरोहर हैं, विरासत हैं इसका हमें गर्व है
आज हम इनको बड़ी ही श्रद्धा के साथ दीप प्रज्वलित कर नमन करते हैं।
जयहिंद! जयबिहारी!
नारायण नारायण नारायण

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