लेख साहित्य

कार्तिक मास महात्म्य

कार्तिक मास पूर्णदायी मासों में से एक माना जाता है। कार्तिक मास में माताएंँ नियमित गंगा स्नान करती हैं और तुलसी पूजन करती हैं। यह मास भगवान विष्णु को अधिक प्रिय है।

इस मास की कृष्ण चौथ को जहाँ सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा करवा चौथ का व्रत किया जाता है वही अमावस्या को जगमग दीपों की लरी सजायी जाती है तथा शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सूर्य षष्ठी पर्व की अनंत खुशियाँ लेकर आती हैं जो मात्र बिहार प्रांत ही नहीं समूचे भारतवर्ष में अपने दिव्यता और पवित्रता के लिए जाना जाता है।
इसी तरह जहाँ शुक्ल पक्ष नवमी तिथि अक्षय नवमी कहलाती है वही एकादशी तिथि हरि प्रबोधिनी के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान श्री हरि नारायण क्षीर सागर में शयन करते हैं और इसी हरि प्रबोधिनी एकादशी को उनका जागरण माना जाता है, इसीलिए चातुर्मास में बंद सभी कार्यों का शुभारंभ इस हरि प्रबोधिनी एकादशी से हो जाता है। इसी तिथि को माताएँ बहनें बड़ी ही श्रद्धा के साथ शालिग्राम भगवान व तुलसी का विवाह पारंपरिक श्रद्धा विश्वास के साथ करती हैं। पूण्तदायी नगरी काशी में आज के दिन समूचे मंदिरों को दीपों से सजाया जाता है और इसे देव दीपावली के नाम से जाना जाता है। तथा चार दिन आगे कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को गुरु नानक देव की जयंती गुरु पर्व मनाया जाता है। समूचा यह कार्तिक मास पूण्यदायी पर्वों से भरा हुआ है इसीलिए जनमानस में इस मास का विशेष महत्व है।

कवि एवं ज्योतिषी
पंडित रामजस त्रिपाठी

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