लेख साहित्य

-: माहिया :-

आओ सावन हो लें।
खुशियों के सागर में,
नफरत अपनी धो लें।।
——–
मैंने न किताब पढ़ी।
सच है मेरे साथी,
हर मन में प्रीति गढ़ी।।
——–
मत रूठो तुम उनसे।
जिनके घर खुशियों के,
बादल न कभी बरसे।।
———
तू चाँद सितारा है।
मन के हर कोने में,
तुझसे उजियारा है।।
——–
घर की जिम्मेवारी।
काँधे पे लिए घूमे,
भारत की हर नारी।।
——-
आओ वह पल जी लें।
मन खुशियों से भर भर,
अँजुरी भर भर पी लें।।

नीता अवस्थी (उन्नाव)

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