आगरा उत्तर प्रदेश

अपनी न्यायोचित मांगों को मनमाने के लिए मशाल जुलूस निकालकर सरकार की करेंगे नींद हराम : विनोद इलाहाबादी

आगरा। मशाल जुलूस को सफल बनाने के लिए आगरा विकास प्राधिकरण और जलकल विभाग में जनजागरण अभियान चलाया विकास प्राधिकरण में वहां के अध्यक्ष श्री वसीउल हसन मलिक की अध्यक्षता में एवं जलकल विभाग में उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ आगरा के मण्डल महामंत्री श्री राकेश सिंह चौधरी की अध्यक्षता में पहले बैठक करके कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के विनोद इलाहाबादी वसीउल हसन मलिक योगेन्द्र शर्मा राजकुमार विद्यार्थी विरेन्दर वार्ष्णेय आर एस राणा ने संयुक्त रूप से कर्मचारी विरोधी सरकार के विरुद्ध उसकी कर्मचारी विरोधी नीतियों को दर्शा कर कहा कि पहले ये सरकार आयी थी तब हमारी पुरानी पैंशन खा गयी और अब इस सरकार ने हमारे भत्ते नौकरी खा रही है एक तरफ सांसद विधायक अन्य जनप्रतिनिधि को एक महीने भी जनप्रतिनिधि रहने पर उसको पैंशन दे रही है और अगर कोई विधायक सांसद और उसके बाद अगर मंत्री बन जाए तो उसे दो दो तीन तीन पैंशन दे रही है और वहीं कर्मचारी अपनी 40 साल भीषण सर्दी गर्मी बरसात मे अपने निरंतर सेवा देता है उसको कोई भी पैंशन नहीं ये दोगली नीति क्यों
कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने बताया कि मोर्चा के आह्वान पर जनपदों में जन जागरण अभियान चल रहा है इसके बाद 27 नवंबर 2021 को सभी जनपदों में मशाल जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा जाएगा इसके बाद 9 दिसंबर 2021 से काम बंदी की जाएगी इसकी नोटिस भेजकर मुख्यमंत्री जी एवं मुख्य सचिव तथा अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक से आग्रह किया गया है कि मोर्चा की मांगों पर बैठक करके उन कर्मचारियों की मांगो पर निर्णय किया जाए जिन्होंने कोविड-19 महामारी से जनता को बचाने के लिए जान पर खेलकर सेवाएं दी है।
नेताओं ने खेद व्यक्त किया है कि पुरानी पेंशन की बहाली, वेतन समिति की संस्तुतियों पर मुख्य सचिव समिति द्वारा सुनवाई करके मंत्री परिषद से निर्णय करा कर शासनादेश जारी न करने, कैशलेस इलाज, स्थानीय निकाय, राजकीय निगमों, विकास प्राधिकरण के पदों का पुनर्गठन करके राज्य कर्मचारियों की भाँति सातवें वेतन आयोग का लाभ देने, घाटे के नाम पर निगमों के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ न देने, घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारी की नहीं होती है वह तो केवल श्रम करता है, महंगाई भत्तों के एरियर का भुगतान करने, आउटसोर्सिंग/संविदा कर्मचारियों के लिए नियमावली बनाने, सरकारी संस्थाओं का निजीकरण बंद करने, आदि मांगों पर निर्णय करने को टाल रही है, दिखावे के लिए कमेटियां गठित करके मांगों को लटका रही है जिसमें किे विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से मांगे अनिर्णित पड़े रहे। सरकार की मंशा मांगों पर निर्णय करने को नहीं लगती है।
विनोद इलाहाबादी आदि नेताओं ने कर्मचारियों एवं उनके संगठनों को बता दिया है कि मशाल जुलूस निकालकर गूंगी बहरी अंधी सरकार की अब नींद हराम करने का समय है साढे चार वर्षों से सरकार कर्मचारियों की कभी भत्ते फ्रीज करके कभी निजीकरण को बढ़ावा देकर हर तबके के कर्मचारियों का शोषण करके नींद हराम कर रही है अब कर्मचारियों का समय आ गया है आन्दोलन से सरकार की तब तक नींद हराम करता रहेगा जब तक कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं होती इसलिए प्रदेश सरकार पर दबाव बनाकर ही मांगों पर निर्णय कराया जा सकता है जिसपर उनका सहयोग चाहिए। मोर्चा ने कर्मचारियों से अपील की है कि मांगों पर निर्णय करने के लिए प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाएं, वरना अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। दोनों जगह की बैठक में मुख्य रूप से विनोद इलाहाबादी वसीउल हसन मलिक योगेन्द्र शर्मा राजकुमार विद्यार्थी विरेन्दर वार्ष्णेय आर एस राणा चौधरी राकेश सिंह दीपू श्रीवास्तव अमित नरवार राजेश चौहान कुलदीप चकृवर्ती सौनू चौहान चरणजीत सिंह शिवम ब्रहम मृणाल सिंह आदि सैंकड़ों कर्मचारी प्रतिनिधि मौजूद थे

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