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सितार के सरताज पं रविशंकर की जयंती पर विशेष

इंडिया समाचार 24
नवीन शर्मा

सितार का नाम लेते ही जिस एक शख्स का नाम ध्यान में आता है वो हैं पंडित रविशंकर। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को विदेशों में खासकर यूरोप और अमेरिका में लोकप्रिय बनाने में काफ़ी अहम भूमिका निभाई।
पंडित रवि शंकर का जन्म 7 अप्रैल, 1920 को बनारस में हुआ था। उनके पिता पश्चिम बंगाल के एक बंगाली ब्राह्मण परिवार से थे। वे प्रख्यात वकील थे। पंडित रविशंकर 10 साल की उम्र बड़े भाई उदय शंकर के साथ पेरिस गए। उदय शंकर प्रसिद्ध नर्तक थे। रवि शंकर ने अपने भाई की मंडली के लिए सितार बजाना शुरू कर दिया।

उस्ताद अलाउद्दीन खां से लिया प्रशिक्षण

1938 में, पंडित रवि शंकर मैहर घराने के प्रसिद्ध उस्ताद अलाउद्दीन खान से सितार बजाने का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। 1950 के दशक में वे ऑल इंडिया रेडियो के संगीत निर्देशक बने।पंडित रविशंकर ने 1953 में सोवियत संघ में प्रदर्शन किया और फिर उसके बाद 1956 में कार्यक्रम करने के लिए पश्चिम गए। एडिनबर्ग फेस्टिवल और रॉयल फेस्टिवल हॉल जैसे प्रमुख कार्यक्रमों में उनके उम्दा प्रदर्शन के परिणामस्वरूप वे दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गये।

अन्नपूर्णा देवी से किया विवाह

पंडित रविशंकर ने अपने गुरु अलाउद्दीन खां की बेटी से प्रेम विवाह किया। उनका नाम बाद में अन्नपूर्णा देवी हुआ। इसके बाद नर्तकी कमला शास्त्री और सू जोनू से रिलेशनशिप में रहे। दूसरा विवाह सुकन्या राजन के साथ किया।

बिटल्स के जार्ज हैरिसन को सितार सिखाया

पंडित रविशंकर भारत, कनाडा, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में फिल्मों और नृत्यनाटक के संगीत से जुड़े। मशहूर बैंड बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन को सितार भी सिखाया। उन्हें फिल्म “गांधी” में अपने संगीत के लिए अकादमी पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।

पुरस्कार व सम्मान

इस प्रसिद्ध सितार वादक को चौदह डॉक्टरेट और डिसिकोट्टम सहित दुनिया भर से कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। इन्हें मैग्सेसे पुरस्कार, पद्म विभूषण दो ग्रैमी पुरस्कार, जापान का ग्रांड फुकुओका पुरस्कार और ‘ग्लोबल एंबेसडर’ के शीर्षक के साथ दावोस से क्रिस्टल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
भारत के यह संगीत राजदूत संयुक्त राष्ट्र अकादमी ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स के एक सम्मानित सदस्य थे और अमेरिकी संगीतकारों के अंतर्राष्ट्रीय मंच के भी सदस्य थे। 1999 को इन्हें भारत के सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

फिल्मों में दिया संगीत

पंडित रविशंकर ने विजय आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म नीचा नगर से फिल्मों में संगीत निर्देशन का काम शुरू किया। इसके बाद अनुराधा, गोदान और मीरा फिल्म में भी अपने संगीत का जादू चलाया। सत्यजीत रे की अपूर्व ट्रायलाजी में भी संगीत दिया।
11 दिसंबर, 2012 को प्रसिद्ध पंडित रविशंकर का 92 वर्ष की आयु में सैन डिएगो में निधन हो गया था। सांस लेने में कठिनाई की समस्या के कारण, उनको स्क्रिप्प्स मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में शाम 4:30 बजे के आस-पास वह इस संसार से विदा हो गये।

पंडित रवि शंकर ने अपनी संगीत की विरासत पत्नी सुकन्या राजन और बेटी, अनुष्का शंकर और नोरा जोन्स को दिया है।

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