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मदरसों के सर्वेक्षण से सामने आएंगे सही तथ्य, खतरनाक साबित होता कट्टरता का पाठ

मदरसों की बिगड़ैल दशा और उनकी भीतरी भयावहता पर कोई यदि खुलकर बोलता है तो असलियत सबके सामने लाने की जरूरत महसूस की जानी चाहिए। मदरसों की आड़ में आतंकी फंडिंग और इस्लामिक आतंकवाद के फैलाव को आखिर कब तक अनदेखा किया जाएगा।

प्रियरंजन भारती। बंगाल एसटीएफ द्वारा हाल ही में पकड़ा गया आतंकी फैजल अहमद और बेंगलुरु से गिरफ्तार मालदा निवासी हसन शेख बंगाल से उत्तराखंड तक स्लीपर सेल तैयार करने में जुटा था। फैजल सहारनपुर के एक मदरसे में रहकर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। उसका संपर्क आतंकी संगठन अलकायदा से था। पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एक मदरसा शिक्षक को पाकिस्तान स्थित आकाओं को भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों की महत्वपूर्ण जानकारियां भेजने के मामले में गिरफ्तार किया गया। यह प्रमाण है कि मदरसों में मजहबी शिक्षा के नाम पर आतंकवादी गतिविधियों के केंद्र चलाए जाते हैं।

 

मदरसों के भीतर संचालित देश विरोधी कारनामों की सूचनाएं निरंतर बाहर आ रही हैं। सरकारी अनुदान पर चलने वाले मदरसे शिक्षा की आड़ में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के अड्डे कैसे बनते जा रहे हैं। इनसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के जुड़े तार सवाल उठाते हैं कि मजहबी शिक्षा की आड़ लेकर आतंक की जड़ें जमाने का बाकायदा षड्यंत्र रचा गया, ताकि देश विरोधी विध्वंसक घटनाओं को अंजाम दिया जा सके और किसी को संदेह तक नहीं हो पाए। ऐसे में सरकारी अनुदान पर पल रहे मदरसों की सच्चाई का पता लगाया ही जाना चाहिए।

मदरसों को आतंक का गढ़ बनाने का आरंभ प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया यानी सिमी ने किया था। इस संगठन ने इस्लामिक गतिविधियों की आड़ में मदरसों को टार्गेट किया और शिक्षा के नाम पर आतंक का पाठ पढ़ाना शुरू किया। भारत नेपाल सीमा से लगे यूपी के सीमावर्ती जिलों में जिस तेजी से मदरसे खोले गए वे स्वाभाविक चिंता का कारण बने हैं। ऐसे में योगी और पुष्कर धामी सरकारें यदि मदरसों का सच जानने के लिए सर्वे करवा रही हैं तो इसमें हर्ज क्या है।

यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि मदरसों की दीनी तालीम पर जोर देने वाला मुस्लिम समाज इन संगठनों को पाक साफ रखने की जिद क्यों नहीं करता। बच्चों को सही शिक्षा दी जाए यह आवश्यक है, ताकि वे राष्ट्र निर्माण के कर्णधार बन सकें। इनके भीतर जिस शिक्षा से राष्ट्रीयता के भाव विकसित हो सकें, उसे हर हाल में बेहतर और समृद्ध होना चाहिए। पर समाज का यह वर्ग इस पर जोर देने के बजाय कट्टरता के फैलाव से आंखें मूंदे रहकर उन्हें शह देता रहेगा तो निश्चित तौर पर देश में कट्टरपंथी अपसंस्कृति पैर पसारेगी ही। यह इसलिए घातक है कि अशिक्षा और कट्टरता के लिए चर्चित मुस्लिम समाज इन वास्तविकताओं के प्रति गंभीर नहीं होना चाहता।

हिंदू परिवारों में सनातनी शिक्षा के प्रति खास आग्रह का अभाव और अल्पसंख्यक कहलाने वाले मुस्लिम समाज में धार्मिक शिक्षा पर विशेष जोर देने से यह रेखांकित हो जाता है कि वर्ग विशेष में रूढ़िवादिता और उससे पनपी विकृतियों की जड़ें कहां हैं। मदरसों के गुमराह होते मकसद के बीच हिंदू परिवारों में धार्मिक शिक्षा के प्रति उदासीनता यह पाठ भी सहज ही पढ़ाती है कि सनातनी समाज क्यों सहिष्णु व उदार है तथा मुस्लिम समाज में धार्मिक कट्टरता के फैलाव की वजहें क्या हैं। समाज निर्माण के अभियान में जुटे अगुआ संगठनों और व्यक्तियों को इस पर अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है, ताकि समाज में विभेद और हिंसा के रास्ते हमेशा के लिए रोककर बंद किए जा सकें।

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