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BrahMos Missile: भारत के किन हथियारों की है दुनिया में बड़ी मांग, हथियारों के निर्यात में कहां खड़े हैं हम

रक्षा सौदों को लेकर भारत की कुछ मुल्‍कों के साथ डील फाइनल हो गई है। कुछ देशों के साथ यह डील एडवांस स्‍टेज में चल रही है। कुछ ने भारत के साथ रक्षा उपकरण लेने की इच्‍छा जताई है। भारत के कौन से रक्षा उपकरणों की घूम है।

अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत केवल हथियारों का आयात ही नहीं करता, बल्कि अब यह उन मुल्‍कों की सूची में शामिल है जो इसका निर्यात करते हैं। भारत के कुछ हथ‍ियारों की विदेशी सेना में भी मांग बढ़ी है। रक्षा सौदों को लेकर भारत की कुछ मुल्‍कों के साथ डील फाइनल हो चुकी है। कुछ देशों के साथ यह डील एडवांस स्‍टेज में चल रही है। कुछ ने भारत के साथ रक्षा उपकरण लेने की इच्‍छा जताई है। आइए इस कड़ी में जानते हैं कि भारत के कौन से रक्षा उपकरणों की घूम है। अंतरराष्‍ट्रीय रक्षा बाजार की प्रतियोगिता में इन हथ‍ियारों ने अपना लोहा मनवाया है।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की धाक

 

1- भारत के ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की धाक दुनिया में है। भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने का फैसला लिया है। वियतनाम के अलावा इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, चिली और ब्राजील समेत 15 देश अब तक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में अपनी दिलचस्‍पी दिखा चुके हैं। बीते पांच वर्षों से भारत के ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की धाक दुनिया में है। भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने का फैसला लिया है। वियतनाम बीते पांच वर्षों से ब्रह्मोस मिसाइल की मांग कर रहा है। इतना ही नहीं हनोई ने ब्रह्मोस खरीदने का आवेदन वर्ष 2011 से कर रखा है।

 

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2- भारत ने पहली बार फ‍िलीपींस के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने का करार किया है। फ‍िलीपींस ने अपनी नौसेना के लिए ब्रह्मोस का सौदा किया है। फ‍िलीपींस के रक्षा मंत्री डेलफ‍िन लोरेंजाना की ओर से 31 दिसंबर को एक नोटिस जारी किया गया था। यह रक्षा सौदा भारत में बने सुरक्षा उपकरणों का पहला सबसे बडा सौदा होगा। पहली बार ब्रह्मोस का परीक्षण वर्ष 2004 में किया गया था। ब्रह्मोस मिसाइल को वर्ष 2007 में शामिल किया गया था। इस मिसाइल के थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के लिए अलग-अलग वर्जन है।

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3- ब्रह्मोस को रूस की मदद से भारत ने बनाया है। ब्रह्मोस रूसी क्रूज मिसाइल पर आधारित है। ब्रह्मोस की मारक क्षमता 500 किलोमीटर है, लेकिन निर्यात किए जाने वाले ब्रह्मोस का रेंज 290 किलोमीटर है क्योंकि मिसाइल टेक्नोलाजी कंट्रोल रिजीम के तहत 300 किलोमीटर के भीतर ही यह रेंज रखने की पाबंदी है। भारत दक्षिण-पूर्वी एशिया में मिसाइल की आपूर्ति कर रहा है। खास कर उन देशों को जिनका चीन से समुद्री या सीमा विवाद है। भारत इस इलाके में कई देशों की रक्षा मदद कर रहा है। खासकर वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड भी ब्रह्मोस खरीदने में दिलचस्पी रखते हैं।

 

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