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मुद्रा में साँस्कृतिक प्रतिबिंब 

डॉ दिलीप अग्निहोत्री 

लखनऊ । एक समय था जब विश्व व्यापार में भारत की भागेदारी सर्वाधिक थी. प्राचीन काल में ही यहां के प्रतापी राजाओं ने व्यापार विनिमय के लिए मुद्रा का चलन कराया था. समय समय पर मुद्रा पर अंकित चित्रों में परिवर्तन होता रहा. आज भी भारतीय राजाओं द्वारा प्रचलित मुद्रा धरोहर के रूप में दिखाई देती है. ब्रिटिश काल की मुद्रा में हमारी परतंत्रता की झलक थी. आज मुद्रा पर महात्मा गांधी के चित्र मानवता और अहिंसा का संदेश देते हैं. राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने कहा कि मुद्रा किसी भी देश की संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतिबिम्ब होती है। इससे तत्कालीन इतिहास एवं अर्थव्यवस्था की जानकारी मिलती है, जिससे हमारी आगामी पीढ़ियों को हमारी समृद्ध संस्कृति का ज्ञान होता है। सिक्कों पर प्राप्त तिथियां एवं अंकन उस कालखण्ड के इतिहास व संस्कृति की जानकारी का सशक्त माध्यम है। क्योंकि सिक्के तत्कालीन धर्म एवं दर्शन व सामाजिक जीवन को प्रतिबिम्बत करते हैं। आनंदीबेन पटेल ने अर्न्तराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान, गोमतीनगर के प्रांगण में राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा  आयोजित भारतीय मुद्रा परिषद के एक सौ चारवें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी को विभिन्न 
शहरों में लगायें तथा उनका भ्रमण भी अपने बच्चों को अवश्य करायें ताकि हमारे बच्चे हमारी संस्कृति के बारे में जान सकें। क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी इस प्रकार की जानकारियों से अनभिज्ञ है. हमारे बच्चे हमारी ऐतिहासिक समृद्धता से अनभिज्ञ हैं। उत्तर प्रदेश का इतिहास बहुत समृद्ध है। हमें अपने बच्चों को ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों पर ले जाकर उन्हें उनसे परिचित कराना चाहिये। क्योंकि हमारी नयी पीढ़ी ही हमारी संस्कृति की संवाहक है।
सिक्कों की दुनिया बहुत निराली है। इसका ज्ञान हमें अपने बच्चों को अवश्य कराना चाहिये। उन्होंने राजभवन में एक सिक्का एल्बम रखने की घोषणा की।

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