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पाचन तंत्र में योग का प्रभाव

लखनऊ

लखनऊ विश्वविद्यालय के योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा संकाय लखनऊ विश्वविद्यालय एवं इंडियन योग फेडरेशन तथा यूपी नेचुरोपैथी एंड योग टीचर्स एंड फिजिशियन एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में " पाचन तंत्र में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का प्रभाव"  राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन डॉ दिलीप कुमार तिवारी, विभागध्यक्ष ए० के० एस० यूनिवर्सिटी, सतना ने बताया कि स्वस्थ पाचन के लिए सात्विक आहार का सेवंन करना चाहिए डेड आहार का सेवन नही करना चाहिए एवं प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से शारिरिक एवं मानसिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसके पश्चात डॉ आर के सिंह, पूर्व कुलपति,श्री भगवान सिंह विश्वविद्यालय ने बताया कि स्वस्थ पाचन के लिए योग जीवन संजीवनी है जिसके माध्यम से जीवन का समग्र विकास होता है
कार्यक्रम के संचालक डॉ अमरजीत यादव ने बताया कि योगाभ्यास के माध्यम जिसके अंतर्गत ताडासन, वृक्षासन, पवनमुक्तासन, बलासन, दंडासन, सुखासन, वीरभद्रासन, त्रिकोणासन, शशांकासन, मार्जारी आसन, विपरीतकरणी,  तथा  अनुलोम विलोम, भ्रामरी, प्राणयाम का प्रयोग कर सकते हैं।
इसके पश्चात डॉ सुनील कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय, देहरादून ने बताया कि योगाभ्यास शरीर की क्षमता के हिसाब  से योगाभ्यास करना चाहिए क्योकि आसनों एवं प्राणायामों की सीमाएं है किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के प्रशिक्षण में ही योगाभ्यास करना चाहिए इसके पश्चात देश भर से आये प्राकृतिक चिकित्सको ने  प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से
स्टीम बाथ, हॉट एंड कोल्ड पट्टी तथा हिप बाथ से कॉन्स्टिपेशन तथा पेट सम्बन्धित बीमारियों में लाभ प्राप्त होता है उदर के विकारों में 20% अम्लीय तथा 80% क्षारीय तथा विटामिन्स, मिनिरल्स सहित भोजन लेना आवश्यक है कार्यक्रम के समापन सत्र में सांस्कृतिक समारोह में कथक का आयोजन किया गया। इस सेमिनार के दौरान देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, प्रशिक्षक, तथा स्नातक- परास्नातक के समस्त छात्र/छात्राएं एवं देश के विभिन्न हिस्सों से विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से सैकड़ो लोगों ने प्रतिभाग किया।

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