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कौन हैं पूर्व कप्तान संदीप सिंह? जिनपर महिला कोेच ने लगाए संगीन आरोप

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह पर एक महिला कोच ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. संदीप सिंह को भारतीय हॉकी इतिहास के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकरों में से एक माना जाता है और उन्होंने भारत के लिए 150 से अधिक गोल किए. संदीप ने साल 2016 में अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेला था.

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह इस समय काफी सुर्खियों में हैं. संदीप सिंह पर एक महिला कोच ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इसके चलते संदीप सिंह के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली. FIR किए जाने के कुछ घंटों बाद संदीप सिंह ने अपना खेल विभाग मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सौंप दिया. संदीप सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट के बाद ही वह फिर से खेल मंत्री की जिम्मेदारी लेंगे. मामले की जांच के लिए डीजीपी ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है.

संदीप के नाम ये बड़ा ओलंपिक रिकॉर्ड

36 साल के संदीप सिंह ने अपने हॉकी करियर में कई कीर्तिमान स्थापित किए. साल 1987 में गुरुचरण सिंह सैनी और दलजीत कौर सैनी के घर जन्मे संदीप को हॉकी खेलने की प्रेरणा अपने बड़े भाई बिक्रमजीत से मिली. दोनों कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद हॉकी अकादमी में बलदेव सिंह के यहां हॉकी के गुर सीखने जाते थे. संदीप की मेहनत रंग लाई और वह सुल्तान अजलन शाह कप में भाग लेने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी बन गए. साल 2004 में ही संदीप सिंह ने एथेंस ओलंपिक में भाग लिया. इसके साथ ही संदीप सिंह ओलंपिक खेलने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय हॉकी प्लेयर बन गए थे.

संदीप के साथ हुआ ये भयावह हादसा

एक साल बाद संदीप सिंह ने जूनियर विश्व कप में गोलों की झड़ी लगा दी और वह साल 2006 में जर्मनी में आयोजित होने वाले सीनियर विश्व कप के लिए भी तैयारियों में जुटे थे. लेकिन 22 अगस्त, 2006 को टूर्नामेंट से कुछ दिन पहले संदीप सिंह के साथ एक भयावह वाकया हुआ. संदीप सिंह टीममेट राजपाल सिंह के साथ शताब्दी ट्रेन में यात्रा कर रहे थे. सफर के दौरान ही गलती से रेलवे सुरक्षा बल के गार्ड ने उनके पीठ रीढ़ में गोली मार दी. इसके चलते वह काफी दिनों से चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर में भर्ती थे.

पेनल्टी कॉर्नर पर दागे कई गोल

संदीप सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और दो साल बाद 2008 में सुल्तान अजलन शाह कप के जरिए भारत के लिए फिर से हॉकी खेलने लौटे. उस इवेंट में उन्होंने कुल नौ गोल दागे. उसी वर्ष संदीप सिंह को भारतीय हॉकी टीम का कप्तान नियुक्त किया गया. उनकी कप्तानी में भारत ने साल 2009 में सुल्तान अजलान शाह कप जीता. संदीप सिंह ने 2009 के इवेंट में भी कुल छह गोल किए और उन्हें टूर्नामेंट का बेस्ट खिलाड़ी चुना गया. संदीप सिंह के नेतृत्व में 2012 में लंदन ओलंपिक में जगह बनाई. क्वालिफाइंग इवेंट में संदीप ने कुल 16 गोल किए, जिसमें फ्रांस के खिलाफ पांच गोल भी शामिल थे. संदीप ने फ्रांस के खिलाफ ये सभी पांच गोल पेनल्टी कार्नर से किए थे.

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अब महिला कोच ने लगाए ये आरोप

चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला कोच ने आरोप लगाया था कि संदीप सिंह ने उन्हें अपने आधिकारिक आवास पर आमंत्रित किया जहां पर उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ. महिला कोच ने मंत्री पर अन्य महिला खिलाड़ियों को प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया था.महिला कोच का आरोप है कि संदीप सिंह ने इसके एवज में अन्य सुविधाओं के अलावा पोस्टिंग के लिए एक पसंदीदा जगह देने का वादा किया था. पीड़िता ने कहा कि जब उन्होंने मंत्री की बात नहीं मानी तो तबादला कर दिया गया और ट्रेनिंग रोक कर प्रताड़ित भी किया जाने लगा.

अब इस पूरे मामले में महिला कोच की शिकायत पर केस भी दर्ज किया गया था. पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक, चंडीगढ़ के सेक्टर 26 पुलिस स्टेशन में खेल मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है. पुलिस की ओर से बताया गया है कि संदीप सिंह के खिलाफ 31 दिसंबर को आईपीसी की धारा 354, 354A, 354B, 342, 506 के तहत केस दर्ज किया गया.

बन गए हॉकी के 'फ्लिकर सिंह'

संदीप को 'फ्लिकर सिंह' के नाम से लोग पुकारने लगे क्योंकि उनकी ड्रैग-फ्लिक स्पीड 145 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से होती थी. संदीप सिंह को भारतीय हॉकी इतिहास के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकरों में से एक माना जाता है और उन्होंने भारत के लिए 150 से अधिक गोल किए. उन्होंने आखिरी बार साल 2016 में इंटरनेशनल मैच खेला था.  संदीप सिंह की जीवनी पर बायोपिक भी बन चुकी है जिसका नाम 'सूरमा' है.

संदीप सिंह की राजनीति में शुरुआत 2019 में हुई, जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में पिहोवा से टिकट दिया. संदीप सिंह की लोकप्रियता से पार्टी को फायदा पहुंचा और बीजेपी के लिए हरियाणा में एक सिख चेहरा भी बन गए. 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के मनदीप सिंह को 5,000 से अधिक वोटों से हरा दिया. बाद में उन्हें मनोहर लाल खट्टर सरकार में खेल मंत्री बनाया गया.

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