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Forensic Movie Review : विक्रांत मैसी- राधिका आप्टे की 'फॉरेंसिक' में प्राची देसाई ने किया कमाल, अंत तक बांधे रखती है फिल्म

करीब 2 घंटे की फिल्म फॉरेंसिक को आपको जरूर देखना चाहिए। फिल्म में काफी छोटे छोटे एलिमेंट्स हैं, जो आपको काफी पसंद आ सकते हैं। फिल्म आपको आखिर तक आपको बांधे रखती है।

फिल्म: फॉरेंसिक
ओटीटी: जी5
स्टारकास्ट: विक्रांत मैसी, प्राची देसाई, राधिका आप्टे, विंदू दारा सिंह और रोहित रॉय
निर्देशक: विशाल फूरिया

क्या है कहानी: फिल्म फॉरेंसिक की कहानी मसूरी में हो रहे बच्चों के मर्डर की मिस्ट्री दिखाती है। फॉरेंसिक फिल्म में बर्थडे के मौके पर करीब 8-12 साल की लड़कियों के मर्डर हो रहे हैं, जिसे सुलझाने की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी मेघा शर्मा (राधिका आप्टे) और फॉरेंसिक एक्सपर्ट जॉनी खन्ना (विक्रांत मैसी) को मिलती है। एक ओर जहां मर्डर मिस्ट्री को लेकर मेघा और जॉनी के सामने नए नए चैलेंज आते हैं तो दूसरी ओर उन दोनों की पर्सनल लाइफ में भी काफी दिक्कतें होती हैं। फिल्म में प्राची देसाई, साइकेट्रिस्ट डॉ. रंजना के किरदार में हैं, हालांकि कुछ ट्विस्ट भी इस में मौजूद हैं।

कैसी है एक्टिंग और निर्देशन: फिल्म में विक्रांत मैसी ने काफी कूल अंदाज में एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट का किरदार निभाया है, और पर्दे पर उनकी मुस्कान और एनर्जी बतौर दर्शक आपको बांधे रखती है। विक्रांत के अलावा राधिका आप्टे ने पुलिस अधिकारी की संजीदगी को बनाए रखा है और इस किरदार में बखूबी जच रही हैं। फॉरेंसिक में राधिका और विक्रांत के अलावा प्राची देसाई ने बेहतरीन काम किया है। शुरुआती फिल्म में आप जरूर सोचते हैं कि आखिर प्राची ने इस जरा से रोल के लिए हां क्यों कहा? लेकिन जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वैसे वैसे आपको समझ आता है कि प्राची का किरदार छोटा नहीं है और उन्होंने बेहद दमदार एक्टिंग की है। इन तीनों के अलावा रोहित बॉस और विंदू दारा सिंह भी अपने किरदार के साथ इंसाफ करते दिख रहे हैं। एक्टिंग के अलावा बात निर्देशन की करें तो विशाल फूरिया इससे पहले नुसरत भरूचा के साथ छोरी लेकर आए थे, और इस बार का काम उनका उससे भी अच्छा है। 

क्या कुछ है खास: फॉरेंसिक में कुछ छोटी छोटी कमिया हैं, लेकिन बतौर दर्शक आप उन्हें आसानी से इग्नोर कर सकते हैं, क्योंकि फिल्म में खास काफी कुछ है। सबसे पहले तो फॉरेंसिक की सिनेमैटोग्राफी काफी क्लीयर है और चूंकि फिल्म छोटे छोटे क्लूज से आगे बढ़ती है, तो उनको उस ही अंदाज में खूबसूरती से दिखाया गया है। सिनेमैटोग्राफी के अलावा फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक, कैमरा वर्क और कलर टोन काफी अट्रैक्टिव है। फिल्म का म्यूजिक भी कहानी को आगे बढ़ाने का काम करता है, जो किसी भी तरह से बोझ महसूस नहीं होता है। 

देखें या नहीं: करीब 2 घंटे की फिल्म फॉरेंसिक को आपको जरूर देखना चाहिए। फिल्म में काफी छोटे छोटे एलिमेंट्स हैं, जो आपको काफी पसंद आ सकते हैं। सीरीज की शुरुआत से आप सोचते रहेंगे कि ये किलर है, या ये किलर है और आखिर तक आते- आते आपके थॉट्स बदलते रहते हैं। फिल्म की खास बात ये है कि ये आपको आखिर तक आपको बांधे रखती है। फिल्म को आप दोस्तों के साथ एन्जॉय कर सकते हैं।

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