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शिवसेना के संसदीय दल में भी फूट, भावना गवली को “चीफ व्हिप” के पद से हटाया

शिवसेना में बड़ी बगावत के बाद एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के सीएम बन गए हैं और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाल रहे हैं। इसके बाद भी शिवसेना की अंदरूनी कलह समाप्त नहीं हुई है।

विधायकों के बाद अब बड़ी संख्या में सांसदों के भी पार्टी नेतृत्व से बगावत के कयास लग रहे हैं। इस बीच नए घटनाक्रम के तहत पार्टी ने सांसद भावना गवली को लोकसभा में शिवसेना के चीफ व्हिप के पद से हटा दिया है। उनकी जगह पर उद्धव ठाकरे के करीबी कहे जाने वाले राजन विचारे को यह जिम्मेदारी दी गई है। शिवसेना के संसदीय दल के नेता संजय राउत ने संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी को लिखे पत्र में पार्टी के इस फैसले की जानकारी दी है।
संजय राउत ने पत्र में लिखा है, ‘आपको यह बताया जाता है कि शिवसेना के संसदीय दल ने राजन विचारे को लोकसभा में भावना गवली के स्थान पर पार्टी का चीफ व्हिप नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की जाती है।’ इस फैसले से विधायक दल में फूट के बाद अब शिवसेना के संसदीय दल में भी टकराव के आसार बढ़ गए हैं। दरअसल एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद भावना गवली ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें भावना गवली ने कहा था कि एकनाथ शिंदे की भूमिका सही थी। उसके बाद से ही चर्चा है कि शिवसेना के 12 सांसद एकनाथ शिंदे गुट के साथ जा सकते हैं। इसमें सबसे आगे भावना गवली का नाम है।
गवली समेत 12 सांसद कर सकते हैं उद्धव ठाकरे से बगावत
शायद इसी के चलते शिवसेना ने उन्हें चीफ व्हिप के पद से हटाने का फैसला लिया है। अब देखना होगा कि इस फैसले पर भावना गवली का क्या रिएक्शन आता है। भावना गवली, एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे समेत कई लोगों की ओर से बगावत का ऐलान किया जा सकता है। बता दें कि मंगलवार को मुंबई से शिवसेना सांसद राहुल शेवाले ने भी उद्धव ठाकरे को एक पत्र भेजा था। इसमें राहुल शेवाले ने बीजेपी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू से समर्थन की गुहार लगाई थी।
राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों के क्रॉस वोटिंग करने की आशंका
सांसदों के रवैये से साफ है कि राष्ट्रपति चुनाव में यदि शिवसेना विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन करती है तो बगावत दिखेगी और क्रॉस वोटिंग हो सकती है। 16 में से करीब 12 सांसद द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में वोट डाल सकते हैं। ऐसा होता है तो फिर यह शिवसेना के संसदीय दल में भी बड़ी टूट की शुरुआत होगी।
 

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