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रविवार, 25 अक्टूबर 2026
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कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0 में जुटे देशभर के हृदय रोग विशेषज्ञ, आधुनिक हृदय उपचार तकनीकों पर हुआ मंथन

आगरा। आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी के तत्वावधान में होटल जेपी पैलेस में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0’ का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन के पहले दिन हार्ट फेलियर, कोरो…

कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0 में जुटे देशभर के हृदय रोग विशेषज्ञ, आधुनिक हृदय उपचार तकनीकों पर हुआ मंथन
कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0 में देशभर से आए हृदय रोग विशेषज्ञों ने आधुनिक उपचार तकनीकों पर चर्चा की।

आगरा। आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी के तत्वावधान में होटल जेपी पैलेस में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0’ का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन के पहले दिन हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, एओर्टा, कार्डियक सर्जरी और स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन (TAVR) सहित हृदय रोगों से जुड़े विभिन्न विषयों पर 20 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें देशभर से आए लगभग 450 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने हृदय रोगों की रोकथाम, आधुनिक उपचार पद्धतियों, जटिल मामलों के प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए।

स्वस्थ हृदय के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी: डॉ. सुवीर गुप्ता

आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने कहा कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में सुधार करना बेहद जरूरी है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब से दूरी बनाने के साथ नियमित रूप से टहलना तथा शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। जिन परिवारों में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों में धूम्रपान हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसे लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

हृदय और किडनी की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी: डॉ. हिमांशु यादव

डॉ. हिमांशु यादव ने ‘हार्ट फेलियर- किडनी इज द की’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हृदय और किडनी एक-दूसरे के कामकाज से गहराई से जुड़े हैं। इनमें से किसी एक अंग की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर दूसरे अंग पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए हृदय रोग और किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के उपचार में दोनों अंगों की स्थिति का आकलन जरूरी है।

सर्जरी के लिए अनुपयुक्त मरीजों में भी आधुनिक एंजियोप्लास्टी से उपचार संभव: डॉ. सुभाष चंद्रा

नई दिल्ली से आए डॉ. सुभाष चंद्रा ने इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ तकनीकों की मदद से जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी उन बुजुर्गों और हाई-रिस्क मरीजों में भी की जा सकती है, जिन्हें ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अनुपयुक्त माना जाता है।

उन्होंने कहा कि TAVR, MitraClip और ट्राइकसपिड वाल्व इंटरवेंशन जैसी तकनीकों ने चयनित मरीजों में बिना पारंपरिक ओपन सर्जरी के वाल्व संबंधी समस्याओं के उपचार की संभावनाएं बढ़ाई हैं। हालांकि, उपचार का चुनाव मरीज की स्थिति और विशेषज्ञों के आकलन के आधार पर किया जाता है।

डुअल एंटीप्लेटलेट थेरेपी में संतुलन जरूरी: डॉ. सुमीत सेठी

नई दिल्ली के डॉ. सुमीत सेठी ने एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) के बाद दी जाने वाली डुअल एंटीप्लेटलेट थेरेपी (DAPT) पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस उपचार में रक्त के थक्के बनने से बचाव और ब्लीडिंग के जोखिम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने क्लोपिडोग्रेल, प्रासुग्रेल और टिकाग्रेलर जैसी दवाओं के उपयोग पर चर्चा करते हुए कहा कि दवा का चयन मरीज की व्यक्तिगत स्थिति, पूर्व चिकित्सा इतिहास और ब्लीडिंग के जोखिम के अनुसार किया जाना चाहिए। विशेष रूप से पूर्व में स्ट्रोक या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) का इतिहास रखने वाले मरीजों में दवा के चयन को लेकर अतिरिक्त सावधानी आवश्यक है।

बिना बड़ी सर्जरी के इलाज में प्रगति, मरीज की सुरक्षा सर्वोपरि: डॉ. सुब्रत अखौरी

फरीदाबाद के डॉ. सुब्रत अखौरी ने कहा कि आजकल मरीज कम चीर-फाड़ वाली उपचार तकनीकों को प्राथमिकता देते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में हुई प्रगति से ऐसी कई प्रक्रियाएं संभव हुई हैं, जिनकी पहले कल्पना करना भी कठिन था।

उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा के लिए जटिलताओं को कम करना और एक व्यवस्थित उपचार प्रणाली अपनाना बेहद जरूरी है। सही मरीज का चयन, सटीक काउंसलिंग और योजनाबद्ध उपचार से जोखिम कम करने में मदद मिलती है।

हृदय और किडनी रोगियों में पोटैशियम का प्रबंधन महत्वपूर्ण: डॉ. जितेंद्र कुमार

फरीदाबाद के डॉ. जितेंद्र कुमार ने हाइपरकलीमिया यानी रक्त में पोटैशियम का स्तर बढ़ने की समस्या पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और हार्ट फेलियर के मरीजों में कुछ महत्वपूर्ण दवाओं के इस्तेमाल के दौरान पोटैशियम बढ़ने की आशंका रहती है।

उन्होंने पोटैशियम नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी और उचित प्रबंधन के महत्व को समझाया। उनके अनुसार, मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार जारी रखने और संभावित जटिलताओं को नियंत्रित करने के लिए चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है। उन्होंने इस विषय में SZC दवा और REALIZE-K ट्रायल से जुड़े निष्कर्षों का भी उल्लेख किया।

TAVR वाल्व खराब होने पर उपचार की रणनीति: डॉ. विवेका कुमार

मैक्स साकेत, नई दिल्ली के डॉ. विवेका कुमार ने TAVR के बाद वाल्व के खराब होने और उसके प्रबंधन पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एओर्टिक स्टेनोसिस के उपचार में TAVR एक महत्वपूर्ण तकनीक बनकर उभरी है, लेकिन समय के साथ वाल्व में खराबी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि वाल्व में स्टेनोसिस या रिगर्जिटेशन जैसी समस्याओं की पहचान करते समय थ्रोम्बोसिस, एंडोकार्डाइटिस और पैरावाल्वुलर लीक जैसी संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए। इसके लिए इकोकार्डियोग्राफी और सीटी स्कैन का संयुक्त मूल्यांकन उपयोगी है।

उपचार के विकल्पों में नियमित निगरानी, उपयुक्त मामलों में एंटीकोआगुलेशन, वाल्व-इन-वाल्व TAVR और चुनिंदा मरीजों में सर्जिकल उपचार शामिल हो सकते हैं। उन्होंने हार्ट-टीम के सामूहिक आकलन और लंबे समय तक फॉलो-अप की आवश्यकता पर जोर दिया।

हार्ट फेलियर की नई गाइडलाइंस में शीघ्र पहचान पर जोर: डॉ. गजिन्दर गोयल

फरीदाबाद के डॉ. गजिन्दर गोयल ने हार्ट फेलियर के उपचार और रोकथाम से संबंधित नई गाइडलाइंस पर चर्चा की। उन्होंने शीघ्र पहचान, जोखिम वाले मरीजों की समय पर जांच और प्रमाण-आधारित उपचार के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने बताया कि हार्ट फेलियर के प्रबंधन में मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार उपचार तय करना, प्रभावी दवाओं का उचित इस्तेमाल और मोटापे से जुड़े मामलों में उपयुक्त उपचार विकल्पों पर विचार करना महत्वपूर्ण है।

हार्ट अटैक के बाद गंभीर वाल्व संबंधी जटिलताओं में नई तकनीकों की भूमिका: डॉ. राजगोपाल जे.

मैसूर के डॉ. राजगोपाल जे. ने हार्ट अटैक के बाद होने वाली एक्यूट सीवियर माइट्रल रिगर्जिटेशन जैसी गंभीर जटिलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में मरीज को समय पर उपचार उपलब्ध कराना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने कहा कि चयनित मरीजों में MitraClip जैसी मिनिमली इनवेसिव तकनीक के माध्यम से वाल्व की मरम्मत की जा सकती है। इससे कुछ मरीजों में पारंपरिक ओपन सर्जरी के विकल्प के रूप में उपचार की नई संभावनाएं विकसित हुई हैं।

सामान्य इजेक्शन फ्रैक्शन के बावजूद हो सकता है हार्ट फेलियर: डॉ. वरुण शर्मा

आगरा के डॉ. वरुण शर्मा ने हार्ट फेलियर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (HFpEF) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हार्ट फेलियर के कुछ मरीजों में हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य दिखाई देती है, इसके बावजूद उन्हें सांस फूलने, थकान और शरीर में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि सामान्य इजेक्शन फ्रैक्शन के कारण कई बार इस स्थिति की पहचान में देरी हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और एट्रियल फाइब्रिलेशन जैसे जोखिम कारकों का मूल्यांकन करते हुए क्लिनिकल स्कोर और बायोमार्कर की मदद से समय पर निदान करना महत्वपूर्ण है।

हार्ट फेलियर में फोर पिलर्स और वेरीसिगुएट थेरेपी पर चर्चा: डॉ. सौरभ नागर

प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ नागर ने हार्ट फेलियर विद रिड्यूस्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (HFrEF) के आधुनिक उपचार पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हार्ट फेलियर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली फोर पिलर्स थेरेपी और वेरीसिगुएट (Vericiguat) दवा की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि सही समय पर प्रमाण-आधारित उपचार शुरू करना मरीजों के बेहतर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। उपयुक्त मरीजों में वेरीसिगुएट का इस्तेमाल हार्ट फेलियर के बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका को कम करने में मदद कर सकता है। उन्होंने आधुनिक दवाओं और नए शोध के आधार पर उपचार की रणनीतियां अपनाने पर जोर दिया।

पद्मश्री डॉ. डी.एस. गंभीर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

सम्मेलन के दौरान जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. दलजीत सिंह गंभीर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में इकोकार्डियोग्राफी के बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित एक ईको बुक का लोकार्पण भी किया गया।

डॉ. तरुण सिंघल के संयोजन में कार्डियोलॉजी विषय पर ज्ञानवर्धक डिबेट आयोजित हुई। सम्मेलन में पद्मश्री डॉ. डी.एस. गंभीर, डॉ. उमर हसन और डॉ. अनिल भान सहित कई विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए। डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. कैलाश विश्वानी, डॉ. एसके कालरा और डॉ. ईशान गुप्ता ने भी विभिन्न विषयों पर विचार रखे।

इसके अलावा डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. एके गुप्ता, डॉ. रजनीश सिंह, डॉ. डीपी अग्रवाल, डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल, डॉ. अनिल सारस्वत, डॉ. केके विश्वानी, डॉ. विकास जैन, डॉ. विजय खुराना, डॉ. आनंद रावत, डॉ. दुर्गेश शर्मा, डॉ. ज्योति गर्ग, डॉ. वीएन कौशल, डॉ. तरुण मित्तल, डॉ. राजीव चुघ, डॉ. एसके कालरा, डॉ. सचिन गोयल और डॉ. अमित गुप्ता विभिन्न सत्रों में पैनलिस्ट और चेयरपर्सन रहे।

कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र ढल ने किया, जबकि सुरेश सिंह ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। इससे पूर्व पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।

25 अक्टूबर को मेडिकल छात्रों के लिए विशेष इकोकार्डियोग्राफी वर्कशॉप

आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने बताया कि 25 अक्टूबर को होटल हॉलीडे इन, संजय प्लेस, आगरा में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मेडिकल छात्रों के लिए विशेष इकोकार्डियोग्राफी वर्कशॉप आयोजित की जाएगी।

इसमें छात्रों को लेफ्ट वेंट्रिकुलर इजेक्शन फ्रैक्शन (LVEF) मापने, हृदय के वाल्व में खराबी की पहचान करने और इकोकार्डियोग्राफी रिपोर्ट पढ़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सम्मेलन का उद्देश्य हृदय रोगों के निदान और उपचार में नवीनतम प्रगति पर विशेषज्ञों के बीच ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान करना तथा मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सहयोग बढ़ाना रहा।

प्रेस विज्ञप्ति जारीकर्ता: आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी
संपर्क नंबर: 8126462856, 9358057729

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Dheeraj singh · Editorial Associate

धीरज सिंह कारोबार, बाज़ार और टेक्नोलॉजी बीट के पत्रकार हैं। शेयर बाज़ार, अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और गैजेट्स पर सरल भाषा में विश्लेषण देना उनकी खासियत है। जटिल आर्थिक मुद्दों को वे आम पाठक के लिए…

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