आगरा। आगरा के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़े हुए मेंटेनेंस शुल्क और यूपीसीडा द्वारा मांगे जा रहे सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन को लेकर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से आवाज उठाई गई। बुधवार को चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में एत्मादपुर विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में औद्योगिक इकाइयों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को विधायक के सामने रखा गया।
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल एवं पूर्व अध्यक्ष अमर मित्तल ने बताया कि यूपीसीडा द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों के रख-रखाव के लिए 35 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मेंटेनेंस चार्ज मांगा जा रहा है। इस हिसाब से 1000 वर्ग मीटर भूमि पर लगभग 35 हजार रुपये प्रतिवर्ष का मेंटेनेंस शुल्क बनता है। चैम्बर के अनुसार यह शुल्क उद्यमियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।
बैठक में बताया गया कि नगर निगम द्वारा औद्योगिक इकाइयों से पहले लगभग 18 हजार से 25 हजार रुपये तक मेंटेनेंस संबंधी शुल्क लिया जाता रहा है। हालांकि नगर निगम के कर की दर रिक्त भूमि और कवर्ड एरिया के साथ-साथ क्षेत्र एवं सड़क की चौड़ाई जैसे विभिन्न आधारों पर अलग-अलग होती है, इसलिए दोनों शुल्कों की सीधी तुलना संभव नहीं है। चैम्बर के अनुसार, उद्यमियों को प्राप्त हो रहे बिलों में यूपीसीडा का शुल्क नगर निगम की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक दिखाई दे रहा है।
चैम्बर पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि बढ़े हुए मेंटेनेंस शुल्क के अनुपात में मिलने वाली सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। इसके साथ ही जल निगम द्वारा जलकर के बिल भेजे जाने से उद्यमियों पर दोहरे शुल्क का भार पड़ने की बात भी बैठक में उठाई गई।
चैम्बर ने विधायक के सामने यह मुद्दा भी रखा कि उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में यूपीसीडा द्वारा मेंटेनेंस शुल्क में आगरा की अपेक्षा रियायत दी गई है। चैम्बर ने शासन स्तर पर हस्तक्षेप कर मेंटेनेंस शुल्क को जल्द कम कराने की मांग की।
सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन का मुद्दा भी उठा
पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार गोयल ने यूपीसीडा द्वारा वर्षों पहले स्थापित औद्योगिक इकाइयों से सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन लेने की प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यूपीसीडा द्वारा आवंटित प्लॉटों पर बड़ी संख्या में इकाइयां लंबे समय से उत्पादन कर रही हैं और जीएसटी, इनकम टैक्स सहित विभिन्न श्रम कानूनों का अनुपालन कर रही हैं।
चैम्बर की ओर से कहा गया कि वर्षों से संचालित औद्योगिक इकाइयों को दोबारा सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन प्राप्त करने के लिए दबाव देना उद्यमियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। चैम्बर ने इस व्यवस्था को जल्द निरस्त कराने और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।
बैठक में चैम्बर ने कहा कि आगरा की औद्योगिक इकाइयां पहले से ही विभिन्न परिस्थितियों और नियमों के कारण चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में नए और व्यावहारिक रूप से कठिन आदेशों से उद्यमियों की परेशानी बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन
विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने चैम्बर द्वारा उठाई गई सभी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने समस्याओं के समाधान के लिए चैम्बर के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से शीघ्र मुलाकात कराने का आश्वासन दिया।
बैठक में धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने किया।
इस अवसर पर चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, अम्बा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष के.के. पालीवाल, शांतिस्वरूप गोयल, सीताराम अग्रवाल, प्रदीप कुमार वार्ष्णेय, अमर मित्तल, मनीष अग्रवाल, अतुल कुमार गुप्ता, अशोक कुमार गोयल, राजीव कुमार अग्रवाल, संजय गोयल, सुनील सिंघल, मयंक कुमार अग्रवाल, प्रदीप गोयल, अंकित दौनेरिया, अमित बंसल, संजय कुमार गोयल, राकेश सिंघल, राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, देवेन्द्र गोयल, सुनील गर्ग, नरेन्द्र तनेजा, संजय अरोरा, राजेश वर्मा, सतीश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
सादर:
अभिनव उपाध्याय
एक्जीक्यूटिव ऑफिसर
