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शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
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8 हजार मतदाताओं पर बड़ा सवाल, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में कथित अनियमितताओं की शिकायत

आयु और शिक्षक पात्रता से लेकर डुप्लीकेट नाम व आवेदन प्रक्रिया तक उठे सवाल, मंडलायुक्त और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जांच की मांगआगरा। विधान परिषद के आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को …

8 हजार मतदाताओं पर बड़ा सवाल, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में कथित अनियमितताओं की शिकायत
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आयु और शिक्षक पात्रता से लेकर डुप्लीकेट नाम व आवेदन प्रक्रिया तक उठे सवाल, मंडलायुक्त और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जांच की मांग

आगरा। विधान परिषद के आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने करीब 8 हजार मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठाते हुए सूची में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। आरोपों में आयु सीमा, शिक्षक होने की पात्रता, सरकारी रिकॉर्ड में विवरण, एक ही व्यक्ति के नाम की दोहरी प्रविष्टि, आवेदन की संस्तुति और निर्धारित समय-सीमा के बाद आवेदन स्वीकार किए जाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

आगरा जिला प्रशासन की वेबसाइट पर आगरा खंड के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मतदाता सूचियों और अंतिम प्रकाशन की जानकारी उपलब्ध है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं द्वारा बताए गए करीब 8 हजार संदिग्ध नामों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

करीब 8 हजार नामों पर सवाल

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मतदाता सूची की जांच के दौरान करीब 8 हजार ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनकी पात्रता पर सवाल उठाए जा सकते हैं। उनका कहना है कि संबंधित नामों और दस्तावेजों की सूची अधिकारियों को शिकायत के साथ उपलब्ध कराई गई है।

अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि इन नामों को मतदाता सूची में शामिल करने से पहले आवेदन और पात्रता संबंधी दस्तावेजों का किस स्तर पर सत्यापन किया गया।

आयु सीमा को लेकर भी आपत्ति

शिकायत में कुछ मतदाताओं की आयु संबंधी पात्रता पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सूची में ऐसे नाम मौजूद हैं, जिनकी आयु संबंधी जानकारी निर्धारित पात्रता से मेल नहीं खाती।

यदि दस्तावेजी जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आवेदन में लगाए गए आयु प्रमाण और मूल अभिलेखों का मिलान करना होगा।

सरकारी पोर्टल पर रिकॉर्ड नहीं होने का दावा

शिकायतकर्ताओं ने कुछ नामों को लेकर यह भी दावा किया है कि संबंधित शिक्षकों का विवरण सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। उनका सवाल है कि यदि किसी व्यक्ति का संबंधित सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था तो उसकी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की पात्रता किस आधार पर स्वीकार की गई।

इस मामले में संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और मतदाता सूची का मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

शिक्षक होने की पात्रता पर भी सवाल

शिकायत में कुछ व्यक्तियों के शिक्षक होने पर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि कुछ ऐसे नाम मतदाता सूची में शामिल हो गए, जिनकी शिक्षक के रूप में पात्रता संदिग्ध है।

ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के विद्यालय, नियुक्ति, सेवा और पात्रता से जुड़े मूल अभिलेखों की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

एक ही व्यक्ति का नाम दो जगह होने का दावा

शिकायतकर्ताओं ने मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने का दावा भी किया है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में नाम और पिता के नाम समेत विवरण एक जैसा दिखाई देता है।

यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है तो संबंधित प्रविष्टियों के मूल आवेदन और पहचान संबंधी रिकॉर्ड का मिलान कर यह निर्धारित किया जाना जरूरी होगा कि यह वास्तविक दोहरी प्रविष्टि है या किसी अन्य कारण से समान विवरण दिखाई दे रहा है।

आवेदन की संस्तुति पर भी सवाल

शिकायत में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार शिक्षक मतदाता बनने के लिए प्रस्तुत प्रपत्रों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्तुति की जानी थी।

आरोप है कि कुछ प्रपत्र कथित रूप से निर्धारित प्रक्रिया से अलग तरीके से निर्वाचन कार्यालय तक पहुंचे। शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि प्रत्येक आवेदन के प्राप्त होने, अग्रसारित होने और जांच किए जाने की प्रक्रिया की जानकारी रिकॉर्ड से मिलाई जाए।

अंतिम तारीख के बाद आवेदन स्वीकार किए जाने का आरोप

शिकायत में कुछ आवेदन निर्धारित अंतिम तिथि के बाद जमा होने का दावा भी किया गया है। यदि ऐसा कोई मामला है तो आवेदन की प्राप्ति की तारीख, अग्रसारण की तारीख और मतदाता सूची में शामिल किए जाने की तारीख की जांच महत्वपूर्ण होगी।

जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

शिकायतकर्ताओं ने मंडलायुक्त आगरा और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, लखनऊ से मामले की जांच कराने तथा मतदाता सूची का पुनः सत्यापन कराने की मांग की है।

पूरे मामले में अब मूल दस्तावेजों की जांच सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई का सवाल उठेगा। वहीं यदि आरोप दस्तावेजी जांच में सही नहीं पाए जाते हैं तो निर्वाचन अधिकारी तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

फिलहाल करीब 8 हजार नामों को लेकर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। मतदाता सूची में वास्तव में कितने अपात्र, दोहरी या संदिग्ध प्रविष्टियां हैं, यह संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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Dheeraj singh · Editorial Associate

धीरज सिंह कारोबार, बाज़ार और टेक्नोलॉजी बीट के पत्रकार हैं। शेयर बाज़ार, अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और गैजेट्स पर सरल भाषा में विश्लेषण देना उनकी खासियत है। जटिल आर्थिक मुद्दों को वे आम पाठक के लिए…

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