गायत्री ज्ञान मंदिर के ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत 462वाँ युगऋषि वाङ्मय की स्थापना सम्पन्न
‘‘ऋषि का सद्साहित्य जीवन जीने की कला सिखाता है - उमानन्द शर्मा

लखनऊ। गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर, लखनऊ के विचार क्रान्ति ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत “सी०बी० गुप्ता बी०एस०एस० महाविद्यालय, चन्द्रावल, लखनऊ, उ०प्र०” के पुस्तकालय में गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खण्डों का 462वाँ ऋषि वाङ्मय की स्थापना का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। डॉ० रीता तिवारी ने अपने प्रिय जीवन साथी स्व० कैप्टेन सुप्रशान्त दुबे, सम्मानित सास-ससुर स्व० सुशीला देवी, स्व० रामाश्रय दुबे एवं पूज्य पिता स्व० मुरलीधर तिवारी की स्मृति में उपरोक्त संस्थान के केन्द्रीय पुस्तकालय में युगऋषि वाङ्मय साहित्य भेंट किया तथा संकाय सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं को अखण्ड ज्योति (हिन्दी) पत्रिका भी भेंट किया।
इस अवसर पर वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमानंद शर्मा ने कहा कि “ऋषि का सद्साहित्य जीवन जीने की कला सिखाता है।” श्री वी० के० श्रीवास्तव एवं डॉ० रीता तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ० सुधा वाजपेयी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
वाङ्मय साहित्य स्थापना के इस अवसर पर गायत्री ज्ञान मंदिर के प्रतिनिधि श्री उमानंद शर्मा, डॉ० रीता तिवारी, श्री वी०के० श्रीवास्तव, श्री देवेन्द्र सिंह और संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ० सुधा वाजपेयी, असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास) डॉ० वन्दना सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) डॉ० पिंकी राय, असिस्टेंट प्रोफेसर (राजनीति विज्ञान) डॉ० जी० के० चतुर्वेदी, असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) सुश्री साहिबा खातुन सहित अन्य संकाय सदस्य तथा छात्र-छात्रायें मौजूद रहे।



