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दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन

डीके श्रीवास्तव

आगरा। दयालबाग़ एजुकेशनल इंस्टिट्यूट की राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन आज समाज विज्ञान संकाय में हर्षोल्लास एवं जागरूकतापूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. सनिल कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में समाज विज्ञान संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. संगीता कुमार, समाजशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. लाजवंत सिंह, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ईश्वर स्वरूप सहाय, डॉ. रजनीश कुमार मीना, डॉ. मोनिका तिवारी, विभिन्न शिक्षकगण, राष्ट्रीय सेवा योजना स्वयंसेवक, बी.ए. सोशल साइंस द्वितीय वर्ष से लेकर पी-एच.डी. शोधार्थी तथा अन्य छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवकों में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, स्वच्छता, हरित परिसर तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता की भावना को विकसित करना था। इस अवसर पर कुल चार प्रमुख गतिविधियों का आयोजन किया गया—व्याख्यान, भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता तथा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण।
कार्यक्रम का शुभारंभ पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित व्याख्यान से हुआ। आज के व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. रजनीश कुमार मीना रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव-विविधता के संरक्षण तथा जनभागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों या अभियानों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर समाज विज्ञान संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. संगीता कुमार ने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमें अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे व्यवहारिक परिवर्तन करने होंगे। उन्होंने प्लास्टिक के कम उपयोग, जल संरक्षण, ऊर्जा बचत तथा वृक्षारोपण को जीवन-शैली का हिस्सा बनाने पर बल दिया।
समाजशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. लाजवंत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने सतत विकास की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि विकास ऐसा होना चाहिए, जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों और संसाधनों की भी रक्षा करे। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय असंतुलन केवल प्राकृतिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और नैतिक संकट भी है।
राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. सनिल कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवन-दृष्टि है जिसे प्रतिदिन व्यवहार में लाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का नियमित हिस्सा बनाएं और समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम गतिविधि के रूप में भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और मानव जीवन में प्रकृति के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में समाज विज्ञान संकाय के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इसमें वजिहा सिद्दिकी ने प्रथम स्थान, अनुष्का ने द्वितीय स्थान तथा आकृति अग्रवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
द्वितीय गतिविधि के रूप में पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें भी समाज विज्ञान संकाय के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, हरित पृथ्वी, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण जैसे विषयों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में अंजली कुमारी ने प्रथम स्थान, सांझ जैन ने द्वितीय स्थान तथा अनुष्का ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी विजेता विद्यार्थी समाज विज्ञान संकाय के प्रथम वर्ष से संबंधित थे। सभी विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
तृतीय गतिविधि के रूप में उत्तर प्रदेश शासन की प्रेरणादायी पहल “एक पेड़ माँ के नाम” के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभियान के तहत दयालबाग परिसर में समाज विज्ञान संकाय के बाहर विभिन्न स्थानों पर पौधे लगाए गए। वृक्षारोपण में राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारीगण, आयोजकगण, स्वयंसेवकों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने लगाए गए पौधों की देखभाल करने और परिसर को हरित बनाए रखने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विचारों को आत्मसात करते हुए यह संकल्प लिया कि वे अपने घर, संस्थान और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाएंगे। कार्यक्रम में बी.ए. सोशल साइंस द्वितीय वर्ष से लेकर पी-एच.डी. शोधार्थियों तक की उपस्थिति ने इसे और अधिक सार्थक बनाया। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल विद्यार्थियों का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण शैक्षणिक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
अंत में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ईश्वर स्वरूप सहाय, डॉ. रजनीश कुमार मीना और डॉ. मोनिका तिवारी ने सभी प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों, निर्णायकों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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