तली-भुनी चीजें पहुंचा रहीं लीवर को नुकसान: डॉ. अनिमेष गुप्ता
उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में आयोजित कैंप में मरीजों की फाइब्रोस्कैन मशीन से की गई जांच

आगरा। उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में ग्लोबल फैटी लीवर दिवस के अवसर पर गुरुवार को एक विशेष हेल्थ शिविर का आयोजन किया गया। इसमें मरीजों के लीवर की फाइब्रोस्कैन मशीन से जांच की गई। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. अनिमेष गुप्ता ने लीवर रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अपने विचार साझा किए।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि लीवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन अधिकतर लोग इसकी अनदेखी तब तक करते हैं, जब तक कोई गंभीर बीमारी न हो जाए। आमतौर पर यह माना जाता है कि लीवर की बीमारियाँ सिर्फ शराब पीने से होती हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि मोटापा, मधुमेह और अनियमित जीवनशैली भी फैटी लीवर के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने एमएएसएच (गैर-अल्कोहल स्टीटो हेपेटाइटिस) के बारे में समझाते हुए कहा कि जब लीवर में वसा कोशिकाओं की मात्रा 5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो इस स्थिति को स्टीटोसिस कहते हैं। इससे लीवर बड़ा और चमकदार हो जाता है। यह स्थिति खतरनाक हो सकती है, भले ही व्यक्ति शराब का सेवन न करता हो।
डॉ. अनिमेष ने बताया कि देश में लाखों लोग फैटी लीवर से पीड़ित हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह एक प्रतिवर्ती स्थिति है। समय रहते सही जीवनशैली अपनाकर और शरीर के वजन को 5 से 7 प्रतिशत तक कम करके लीवर को पूरी तरह स्वस्थ बनाया जा सकता है।
उन्होंने मोटापा और मधुमेह के बढ़ते मामलों के पीछे गतिहीन जीवनशैली और बढ़ती जंक फूड की प्रवृत्ति को जिम्मेदार ठहराया। डॉ. गुप्ता ने सलाह दी कि हमें देर रात भोजन करने, तैलीय और तली-भुनी चीजों से बचना चाहिए। इसके बजाय ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और संतुलित आहार अपनी दिनचर्या में शामिल करें। स्वस्थ लीवर के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, नियमित व्यायाम करें और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अवश्य करवाएं।



