विश्व नर्सिंग दिवस विशेष: SNCU में उपचार के साथ परिवारों में भी बढ़ रहा भरोसा
वर्ष 2024 से अब तक 1151 नवजात स्वस्थ होकर लौट चुके हैं घर

आगरा। जिला महिला अस्पताल (लेडी लॉयल) स्थित सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में गंभीर रूप से बीमार नवजातों का उपचार केवल चिकित्सकीय देखभाल तक सीमित नहीं है। यहां उपचार के दौरान परिवारों को भी नवजात की देखभाल से जोड़ने और उनमें भरोसा बनाए रखने पर लगातार काम किया जा रहा है। यूनिट में भर्ती होने वाले कई परिवार शुरुआत में नवजात की स्थिति को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसे में उपचार, लगातार निगरानी, फीडिंग सपोर्ट और परिवार की भागीदारी के साथ धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति में सुधार आने पर परिवारों में भरोसा भी बढ़ता है।
इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024 में “SNCU ग्रेजुएट” पहल शुरू की गई। नर्सिंग ऑफिसर श्वेता सिंह बताती हैं कि एक नवजात को सांस लेने में तकलीफ, दूध न पचने और संक्रमण के लक्षणों के साथ SNCU में भर्ती किया गया था। भर्ती के बाद बच्चे को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया और उसकी लगातार निगरानी की गई। साथ ही मां को कंगारू मदर केयर (KMC) और स्तनपान से जुड़ी देखभाल में सहयोग दिया गया। कुछ दिनों बाद बच्चे ने दूध पीना शुरू किया और उसका वजन भी बढ़ने लगा। स्वस्थ होने के बाद परिवार ने स्टाफ के साथ एक तस्वीर खिंचवाई, जिसे SNCU में लगाया गया। इसके बाद यूनिट में स्वस्थ होकर घर लौटने वाले नवजातों को “SNCU ग्रेजुएट” के रूप में चिन्हित करने की शुरुआत हुई।
श्वेता सिंह बताती हैं कि यूनिट में लगी ये तस्वीरें नए परिवारों के लिए भी एक भरोसे की तरह काम करती हैं। इलाज के लिए पहुंचे कई परिवार इन तस्वीरों को देखकर यह महसूस करते हैं कि समय पर उपचार और लगातार देखभाल से बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट सकते हैं। उनका कहना है कि SNCU में नवजात की रिकवरी केवल उपचार तक सीमित नहीं होती, बल्कि परिवार को देखभाल की प्रक्रिया से जोड़ना भी जरूरी होता है।
SNCU में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ रेखा गुप्ता, पूर्णिमा, रिंकी, रिताक्षा, अमित शर्मा और अखिलेश का कहना है कि नवजात की देखभाल में लगातार निगरानी, समय पर फीडिंग सपोर्ट, परिवार से संवाद और KMC जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कई बार परिवारों को नवजात को छूने या संभालने में भी डर लगता है, ऐसे में उन्हें धीरे-धीरे देखभाल की प्रक्रिया से जोड़ना जरूरी होता है।
SNCU के प्रभारी इंचार्ज नर्सिंग ऑफिसर केके शर्मा ने बताया कि “SNCU ग्रेजुएट” पहल ने यूनिट के भीतर एक सकारात्मक माहौल बनाने में भी मदद की है। स्वस्थ होकर घर लौटे बच्चों की तस्वीरें परिवारों के लिए भरोसे का माध्यम बन रही हैं और स्वास्थ्यकर्मियों को भी अपने काम के परिणामों को देखने का अवसर देती हैं।
एसआईसी डॉ. पुष्पलता ने बताया कि जिला महिला अस्पताल के SNCU में 12 बेड, सी-पैप और KMC वार्ड की सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2024 से अब तक यहां 1151 नवजात स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
SNCU के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत, दूध न पीना या संक्रमण जैसे लक्षण दिखने पर नवजात को जल्द स्वास्थ्य इकाई तक पहुंचाना जरूरी है। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू केसरवानी ने बताया कि समय पर रेफरल, नियमित निगरानी और गुणवत्तापूर्ण देखभाल नवजातों की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



