उत्तर प्रदेशलखनऊ

भारतीय ज्ञान परंपरा की शाश्वत विरासत

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

लखनऊ। भारतीय ज्ञान परंपरा में शाश्वत चिंतन का समावेश है। इसमें शाश्वत जीवन मूल्य है। इसलिए यह वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने इस तथ्य को रेखांकित किया।
कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली का मूल उद्देश्य केवल रोजगार नहीं,बल्कि जीवन निर्माण रहा है। सा विद्या या विमुक्तये की भावना के अनुरूप भारतीय शिक्षा चरित्र निर्माण, विवेक जागरण और करुणा के संस्कार प्रदान करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
आनंदीबेन पटेल आज महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय, अयोध्या में आयोजित श्रीराम की पैंतीस फीट ऊँची दिव्य प्रतिमा के अनावरण समारोह एवं भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शिक्षा संगोष्ठी कार्यक्रम में सम्मिलित हुईं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की यह भव्य प्रतिमा स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण के साथ ही सत्य, धर्म, करुणा और कर्तव्य जैसे मानव जीवन के सर्वाेच्च आदर्शों की जीवंत अभिव्यक्ति है। भगवान श्रीराम भारत की सांस्कृतिक चेतना के केन्द्र हैं और वे सुशासन, सामाजिक समरसता एवं नैतिक नेतृत्व के कालातीत आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
अयोध्या को रामराज्य के आदर्शों का शाश्वत प्रतीक बताते हुए कहा कि यह नगरी न्याय, करुणा, नैतिक शासन और सामाजिक समरसता का संदेश देती है।
प्रभु श्रीराम का जीवन यह संदेश देता है कि सत्ता सेवा का माध्यम हो, शक्ति संयम से संचालित हो तथा निर्णय लोकमंगल से प्रेरित हों। आधुनिक विकास की दौड़ में मानवीय मूल्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और श्रीराम के आदर्श हमें यह स्मरण कराते हैं कि वास्तविक विकास नैतिकता और करुणा के बिना संभव नहीं है।

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