जहां सांपों का था डेरा, वहां हो रहा स्वास्थ्य सवेरा, आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर बढ़ रही स्वास्थ्य सुविधाएं

अलीगढ़। जिस स्थान पर लोगों की नीयत नेक और लक्ष्य एक हो, वहां पर कुछ भी संभव है। अलीगढ़ के जवां ब्लॉक स्थित ग्राम मंजूरगढ़ी का आयुष्मान आरोग्य मंदिर इस बात का जीवंत उदाहरण है। जिस भवन में कभी घास उगी रहती थी, बैठने की जगह नहीं थी और सांपों का बसेरा था, आज वहीं सुसज्जित, सक्रिय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहा है। वर्ष 2024 में एनक्वास प्रमाणीकरण मिलने के बाद यहां मरीजों का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर मंजूरगढ़ी की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) निदा रिजवी बताती हैं कि जब उन्होंने कार्यभार संभाला, तब केंद्र की हालत बेहद खराब थी। भवन असुरक्षित था, यहां तक कि चोर इनवर्टर तक चुरा ले गए थे। उन्होंने यह समस्या विभागीय अधिकारियों, ग्राम प्रधान, जन आरोग्य समिति और ग्रामीणों के सामने रखी। इसके बाद सामूहिक प्रयास शुरू हुआ और केंद्र का कायाकल्प संभव हो सका। निदा बताती हैं कि सीएचसी जवां के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंकित सिंह, डीसीपीएम कमलेश चौरसिया, बीसीपीएम रजिया, बीपीएम राजकुमार के सहयोग से केंद्र का कायाकल्प हो सका व एनक्वास प्रमाणीकरण मिला।
यह आयुष्मान आरोग्य मंदिर 12,480 की आबादी को कवर करता है। यहां 12 आशा कार्यकर्ता, आठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और दो आशा संगिनी सेवाएं दे रही हैं। शुरुआत में लोगों का भरोसा कम था, लेकिन जन आरोग्य समिति के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया गया, जिससे अब नियमित रूप से मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
वर्तमान में केंद्र पर 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं, 14 प्रकार की जांच और 84 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिक से लेकर आवश्यक सेवाएं यहीं मिल रही हैं। प्रति माह औसतन छह से अधिक संस्थागत प्रसव हो रहे हैं। नवजात शिशुओं के लिए वार्मर की सुविधा भी उपलब्ध है। नियमित टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, निक्षय दिवस और आरोग्य मेले जैसी गतिविधियां भी यहां संचालित होती हैं। वर्ष 2021 से अब तक केंद्र पर 241 सुरक्षित प्रसव हो चुके हैं।
पंचायत और समुदाय की भूमिका रही निर्णायक
ग्राम प्रधान कमलेश देवी बताती हैं कि 2021 में पदभार संभालते समय केंद्र की स्थिति बेहद खराब थी। पंचायत, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के सहयोग से व्यवस्थाएं दुरुस्त की गईं। अब गांव की महिलाएं स्वास्थ्य समस्याओं के लिए सीधे आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहुंचती हैं।
जन आरोग्य समिति, मंज़ूरगढ़ी के सदस्य चंद्र प्रकाश बताते हैं कि हमने ग्राम स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता समिति और जन आरोग्य समिति सहित पंचायत निधि के फंड का उपयोग करके केंद्र को सुदृढ़ बनाया। इसके बाद सीएचओ मैडम के सहयोग से यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू हो पाईं। अब यहां पर पूरे गांव के लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
महिलाओं और बच्चों को मिला सबसे अधिक लाभ
वर्ष 2019 से यहाँ कार्यरत आशा कार्यकर्ता स्वाति बताती हैं – केंद्र का कायाकल्प होने के बाद सबसे अधिक फायदा महिलाओं को हुआ है। पहले महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर परेशान रहती थीं, लेकिन अब सीधे हमें बताती हैं और केंद्र पर जाकर अपना उपचार करा लेती हैं। केंद्र के सशक्त होने से महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक लाभ हुआ है। एनीमिया प्रबंधन में सुधार हुआ है और टीकाकरण को लेकर लोगों की झिझक भी खत्म हुई है।
अभिभावकों के लिए केंद्र वरदान से कम नहीं
ग्राम बिस्मिल्लाह कॉलोनी, मंजूरगढ़ी की निवासी 26 वर्षीय शबाना बताती हैं कि उनके दोनों बच्चों का प्रसव यहीं हुआ। दूसरे बच्चे के जन्म के समय सांस न आने की स्थिति में न्यू बॉर्न कार्नर (रेडियंट वार्मर) में समय पर उपचार (resuscitation) से उसकी जान बचाई गई। उनके लिए यह केंद्र किसी वरदान से कम नहीं है।
—
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी ने कहा कि “आयुष्मान आरोग्य मंदिर मंजूरगढ़ी यह साबित करता है कि जब स्वास्थ्य विभाग, पंचायत और समुदाय मिलकर काम करते हैं तो जमीनी स्तर पर बड़ा बदलाव संभव होता है। एनक्वास प्रमाणीकरण के बाद यहां सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसका सीधा असर मरीजों के भरोसे और सेवाओं के उपयोग पर पड़ा है। हमारा प्रयास है कि जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर इसी तरह गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और जन-अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनें”





