लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने की दिशा में ठोस कार्यवाही की जाए: राज्यपाल

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज जन भवन के गांधी सभागार में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर की समीक्षा बैठक एवं प्रस्तुतीकरण संपन्न हुआ। बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय, शोध, छात्र कल्याण तथा कृषि प्रसार गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय के समग्र विकास हेतु एक प्रभावी एसओपी तैयार कर विकास कार्यों को समयबद्ध एवं व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक कार्य की स्पष्ट कार्ययोजना हो तथा उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
बैठक में विश्वविद्यालय में लंबित पेंशन एवं जीपीएफ संबंधी समस्याओं, जर्जर भवनों, अधूरे निर्माण कार्यों तथा अन्य प्रशासनिक एवं वित्तीय समस्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल जी ने इन विषयों पर पृथक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उक्त बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी एवं मंत्रीगण उपस्थित रहें तथा विश्वविद्यालय से संबंधित सभी समस्याओं के समाधान एवं निराकरण पर गंभीरतापूर्वक चर्चा की जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने की दिशा में ठोस कार्यवाही की जाए।
राज्यपाल जी ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कृषि यंत्रों एवं तकनीकों का लाभ किसानों तक बड़े स्तर पर पहुंचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू कर कृषि यंत्रों का बड़े पैमाने पर निर्माण सुनिश्चित करे, जिससे किसानों एवं महिलाओं को इसका व्यापक लाभ प्राप्त हो सके।
राज्यपाल जी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा देशहित में ईंधन की खपत कम करने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने, साइकिल एवं पैदल चलने की आदत विकसित करने, ऊर्जा एवं संसाधनों के संयमित उपयोग, आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम करने तथा अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचते हुए बचत एवं आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने संबंधी दिए गए संदेशों का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय को इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय सहभागिता करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बीच जनजागरूकता अभियान चलाए तथा स्वस्थ, अनुशासित एवं राष्ट्रहितकारी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करे। भविष्य में इसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। यदि लोग साइकिल अथवा पैदल चलने की आदत अपनाते हैं तो इससे स्वास्थ्य में सुधार होगा तथा देशहित में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय में बीएमआई मशीन स्थापित करने के निर्देश दिए, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा तेल के उपयोग में कमी, बच्चों में मोटापा कम करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर दिए गए संदेशों पर विश्वविद्यालय में चर्चा होनी चाहिए तथा इस दिशा में ठोस कार्य किए जाने चाहिए।
उन्होंने मोटे अनाज (मिलेट्स) से बने पौष्टिक व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा उनका बड़े स्तर पर उत्पादन एवं प्रसंस्करण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को पौष्टिक आहार मिलेगा तथा विश्वविद्यालय के लिए आय सृजन का माध्यम भी विकसित होगा। राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करे तथा उन्हें कौशल, शोध, नवाचार एवं रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ा जाए।
बैठक में राज्यपाल जी ने पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत पीड़ित बच्चियों के संरक्षण एवं मार्गदर्शन के विषय को भी गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पीड़ित बच्चियों की देखभाल जन भवन द्वारा की जा रही है, उसी प्रकार विश्वविद्यालयों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में पीड़ित बच्चियों एवं बच्चों के प्रति संवेदनशील होकर कार्य करना चाहिए। विश्वविद्यालयों, अभिभावकों एवं समाज सभी को इस दिशा में सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं पर संवेदनशीलता के साथ विशेष ध्यान दिया जाए। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं व्यवहारिक समझ के माध्यम से छात्राओं का मार्गदर्शन किया जाए तथा उन्हें सही दिशा प्रदान की जाए। राज्यपाल जी ने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने गुजरात में अध्ययन के दौरान एक बेटी को न्याय दिलाने में सहयोग किया था। उन्होंने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय ऐसे मामलों पर सतत निगरानी रखे तथा अध्यापक, प्राचार्य, अभिभावक एवं समाज मिलकर बेटियों का मार्गदर्शन एवं सहयोग करें।
राज्यपाल जी ने शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियमानुसार चयन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में शोध एवं प्रकाशनों की संख्या बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को यह भावना रखनी चाहिए कि “विश्वविद्यालय मेरा है” तथा उसके विकास के लिए सभी को सामूहिक रूप से कार्य करना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय परिसर में एक स्थान चिन्हित कर वहां विद्यार्थियों के लिए उपयोग होने वाली सब्जियों का उत्पादन किया जाए तथा छात्र भी इस कार्य में सहभागिता करें।
राज्यपाल जी ने छात्रावासों के किचन में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक भोजन सुनिश्चित करने तथा विशेष रूप से बालिकाओं सहित सभी विद्यार्थियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा उनसे यह भी चर्चा की जाए कि वे भविष्य में क्या करना चाहते हैं और उनके जीवन के लक्ष्य क्या हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि भोजन में निम्न गुणवत्ता वाले मसालों अथवा अस्वास्थ्यकर सामग्री का प्रयोग न हो। विद्यार्थियों को भोजन परोसने से पूर्व अध्यापक स्वयं भोजन की गुणवत्ता की जांच करें।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों को इनफ्लिबनेट (सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र) तथा ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ योजना का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को ई-जर्नल्स, शोध पत्रों, डिजिटल लाइब्रेरी तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की अध्ययन सामग्री तक सहज पहुंच प्राप्त हो सके।
बैठक में राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय को निर्देशित किया कि उसके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों का सर्वे कराया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि 31 अगस्त तक जो बच्चे तीन वर्ष के हो चुके हैं, प्रत्येक बच्चे का जून माह में आंगनबाड़ी केंद्र में नामांकन हो। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी से आगे की कक्षाओं में बच्चों का समयबद्ध प्रवेश भी सुनिश्चित किया जाए तथा इस दिशा में विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि जिन खाद्य पदार्थों की बाजार में अधिक मांग है, उनका उत्पादन बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि कृषि उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराया जाए। विश्वविद्यालय स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कृषि उत्पादन एवं तकनीकों को विकसित करे ताकि क्षेत्रीय किसानों को उसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।



