विरासत एवं आध्यात्मिक संस्कृति के प्रतीक केन्द्रों का पुनर्प्रतिष्ठा

विगत कुछ वर्षों से भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों की पुनर्प्रतिष्ठा को नया आयाम मिल रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बागपत में नव नाथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सहभागी हुए। उन्होंने कहा कि …
सनातन धर्म ने कभी भी किसी पर जबरदस्ती आधिपत्य स्थापित नहीं किया है और जबरन किसी को गुलाम बनाने का कार्य नहीं किया है। दुनिया में भारत एक ऐसा देश है, जो लगातार विदेशी आक्रांताओं से जूझता रहा और सम-विषम परिस्थितियों में लड़ता रहा। जिन आक्रांताओं ने भारत के सनातन धर्म के प्रतीक मन्दिरों, मठों और पवित्र तीर्थ स्थलों को विखण्डित करने का प्रयास किया था, उन सभी तीर्थ स्थलों की फिर से पुनर्प्रतिष्ठा हो रही है, लेकिन उन आक्रांताओं का आज नामो-निशान भी नहीं बचा है। यही सनातन की ताकत है।
बागपत एक पौराणिक स्थल है। इसका इतिहास महाभारतकालीन है। भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों से पाण्डवों के लिए जो पाँच गाँव माँगे थे, उसमें से बागपत भी एक था। आज यह बागपत एक जनपद है। इसी प्रकार, अन्य गाँवों में से सोनीपत और पानीपत हरियाणा राज्य के जनपद हैं।
हम अपने अतीत से जुड़कर ही अपने उज्जवल भविष्य की कामना कर सकते हैं। हम काशी विश्वनाथ मन्दिर के अपमान को विस्मृत नहीं कर सकते। हमने अयोध्या को विस्मृत नहीं किया।
सोमनाथ मन्दिर, काशी विश्वनाथ मन्दिर, अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर, महाकाल में महालोक, विन्ध्यवासिनी धाम तथा केदारपुरी का पुनरुद्धार कार्य सम्पन्न हुआ।
जन-जागरण में धर्म की अलख जगाने के लिए के जिस विशाल कार्य को अपने हाथों में लिया था, उनके सिद्धों एवं योगियों ने गुलामी के कालखण्ड में भी उस जन-जागरण को निरन्तरता प्रदान की। विदेशी आक्रान्ताओं के आक्रमण के समय भी सिद्ध योगी सारंगी वादन एवं भजनों के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को एकजुट कर आक्रान्ताओं के खिलाफ खड़ा करते थे। यह होती है राष्ट्रभक्ति, जो सिर्फ गुफाओं और मन्दिरों तक सीमित नहीं रही।



