चिंतन शिवर से समाज कल्याण और व्यवहारिक परिवर्तन, राज्यपाल ने साझा किए गुजरात के अनुभव

लखनऊ। चिंतन शिविर से समाज और व्यक्तिगत जीवन में व्यवहारिक परिवर्तन होता है। जिसका सकारात्मक प्रभाव कार्य संस्कृति एवं कार्य निष्पादन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रायबरेली स्थित आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों हेतु आयोजित चिंतन शिविर को संबोधित किया। उन्होंने गुजरात के अपने अनुभव साझा किए। कहा कि हमें अपने अनुभवों का उपयोग समाज कल्याण के लिए करना चाहिए।
प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई क्षमता एवं कौशल अवश्य होता है। छोटी-छोटी बातों एवं त्रुटियों पर भी ध्यान देना चाहिए तथा यदि कोई गलती हो जाए तो उसे स्वीकार कर भविष्य में दोबारा न होने देने का प्रयास करना चाहिए।
ना हो अन्न की बर्बादी
राज्यपाल ने अन्न की बर्बादी रोकने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सभी को उतना ही भोजन ग्रहण करना चाहिए जितनी आवश्यकता हो तथा बच्चों को भी इस संबंध में संस्कारित किया जाना चाहिए। समाज में समानता एवं समरसता की भावना को मजबूत करने के लिए सभी को समान दृष्टि से देखने की आवश्यकता है।



