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गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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किशोरों की अपनी भाषा में उनकी अपनी दुनिया की कहानी, रिश्तों और सामाजिक चुनौतियों को शब्द देती है पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक

आगरा। मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में जब बच्चों और किशोरों का किताबों से जुड़ाव लगातार चुनौती बनता जा रहा है, ऐसे समय में लेखक एवं शिक्षाविद् पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक ‘Teen in the Canteen’ किशोरों …

किशोरों की अपनी भाषा में उनकी अपनी दुनिया की कहानी, रिश्तों और सामाजिक चुनौतियों को शब्द देती है पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक
Image Caption लेखक एवं शिक्षाविद् पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक ‘Teen in the Canteen’, जो किशोरों की भावनाओं, रिश्तों और आज की सामाजिक चुनौतियों को उनकी सहज भाषा में प्रस्तुत करती है।

आगरा। मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में जब बच्चों और किशोरों का किताबों से जुड़ाव लगातार चुनौती बनता जा रहा है, ऐसे समय में लेखक एवं शिक्षाविद् पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक ‘Teen in the Canteen’ किशोरों की दुनिया को उनकी अपनी भाषा और अंदाज में समझने की पहल करती है।

यह पुस्तक किशोरों के जीवन से जुड़े उन विषयों को सामने लाती है, जिनका सामना वे स्कूल, घर और समाज में प्रतिदिन करते हैं। दोस्ती, रिश्ते, भावनाएं, दबाव, असमंजस, गलतफहमियां और किशोरावस्था में उठने वाले अनेक सवाल इन कहानियों के केंद्र में हैं।

पुस्तक की खास बात इसका द्विभाषी स्वरूप है। इसमें हिंदी और अंग्रेजी का प्रयोग उसी सहज अंदाज में किया गया है, जिस तरह आज के किशोर आपस में बातचीत करते हैं।

किशोरों को उपदेश नहीं, संवाद का माध्यम

‘Teen in the Canteen’ किशोरों को केवल उपदेश देने के बजाय उनसे संवाद करने का प्रयास करती है। कहानियों में उनके मन की उलझनों, छोटी-छोटी खुशियों, दोस्ती और रिश्तों की संवेदनशीलता के साथ उन सवालों को भी जगह दी गई है, जिन्हें किशोर अक्सर अपने भीतर रखते हैं।

इस दृष्टि से यह पुस्तक केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि किशोरों और बड़ों के बीच संवाद का माध्यम बनने का प्रयास है। पुस्तक के जरिए किशोरों की भावनाओं और उनके रोजमर्रा के अनुभवों को सहज तरीके से सामने लाने की कोशिश की गई है।

लेखक की साहित्यिक यात्रा

पुनीत वशिष्ठ लंबे समय से शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों से जुड़े रहे हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा में ‘मृत्युंजय’ सहित कई पुस्तकों का योगदान रहा है। ‘Teen in the Canteen’ उनकी लगभग दसवीं या ग्यारहवीं पुस्तक के रूप में सामने आ रही है।

उनकी साहित्यिक सक्रियता केवल व्यक्तिगत लेखन तक सीमित नहीं है। वे GD Goenka Public School, Agra से भी जुड़े हैं, जहां विद्यार्थियों के बीच लेखन और साहित्य को बढ़ावा देने की निरंतर पहल देखने को मिलती है।

2021 में छात्रा इशिका बंसल को मिला राज्य स्तरीय सम्मान

वर्ष 2021 में इसी स्कूल की छात्रा और ताज नगरी की युवा लेखिका इशिका बंसल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राज्य स्तरीय स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

सम्मान के तहत उन्हें स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा, प्रशस्ति पत्र और 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

यह उपलब्धि स्कूल में साहित्य और रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनी।

Literature Fest बना लेखन की संस्कृति का आधार

इसके बाद GD Goenka Public School, Agra में हर वर्ष Literature Fest का आयोजन किया जाने लगा। इस आयोजन में साहित्य, सिनेमा, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित लोग शामिल होते रहे हैं।

डॉ. अन्नू कपूर, पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, अभिनेता राजपाल यादव सहित कई लेखक, गीतकार, साहित्यकार और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग इस साहित्य उत्सव का हिस्सा बन चुके हैं।

इस पहल ने विद्यार्थियों को केवल किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें स्वयं लिखने और अपनी रचनात्मकता को पुस्तक के रूप में सामने लाने का अवसर भी दिया।

100 से अधिक विद्यार्थियों ने लिखीं किताबें

इस साहित्यिक वातावरण की प्रमुख उपलब्धियों में से एक यह है कि GD Goenka School के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने अब तक किताबें लिखी हैं।

डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया के दौर में विद्यार्थियों को पढ़ने, सोचने और लिखने के लिए प्रोत्साहित करने की यह पहल उन्हें रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देती है।

स्कूल प्रबंधन की ओर से साहित्य, लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को लगातार प्रोत्साहित किए जाने से विद्यार्थियों में लेखन की संस्कृति विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। यहां बच्चों को केवल पाठक के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लेखक के रूप में भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

‘Teen in the Canteen’ से आगे भी जारी है साहित्यिक सफर

पुनीत वशिष्ठ की साहित्यिक यात्रा अभी जारी है। वर्तमान में वे ‘Principal of Principles’ और ‘यात्रा’ नामक दो अन्य पुस्तकों पर भी काम कर रहे हैं।

‘Teen in the Canteen’ इसी निरंतर साहित्यिक यात्रा की अगली कड़ी है। यह पुस्तक किशोरों को समझने, उनकी भाषा में उनसे संवाद करने और उनके अनुभवों को साहित्य का हिस्सा बनाने का प्रयास करती है।

किताब का संदेश

‘Teen in the Canteen’ का मूल संदेश सरल है—किशोरों को केवल समझाने की जरूरत नहीं, बल्कि उन्हें समझने की भी जरूरत है।

स्कूल की कैंटीन से लेकर घर और समाज तक किशोर जिस दुनिया में जीते हैं, उसी दुनिया की कहानियों के माध्यम से पुस्तक उनके सवालों, भावनाओं और अनुभवों को आवाज देने का प्रयास करती है।

यही इसकी प्रमुख विशेषता है और यही इसे किशोर पाठकों के लिए अलग बनाती है।

‘Teen in the Canteen’ केवल एक किताब नहीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच संवाद शुरू करने की कोशिश है।

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Dheeraj singh · Editorial Associate

धीरज सिंह कारोबार, बाज़ार और टेक्नोलॉजी बीट के पत्रकार हैं। शेयर बाज़ार, अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और गैजेट्स पर सरल भाषा में विश्लेषण देना उनकी खासियत है। जटिल आर्थिक मुद्दों को वे आम पाठक के लिए…

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