आगराउत्तर प्रदेश

आगरा को जिन्होंने कराया आजाद, सदियों से था गुलाम, आज उनका नहीं है नामोनिशान

आगरा। जी हां अजेय रियासत भरतपुर के अजेय महाराजा सूरजमल जी ने 12 जून 1761 को आगरा किले पर कब्जा कर सदियों से गुलाम आगरा को मुगल सल्तनत से आजाद कराने का काम किया था उन्होंने आगरा ही नहीं महाराजा सूरजमल व उनके पुत्र महाराजा जवाहर सिंह ने ब्रज क्षेत्र से मुगलों से जमकर लोहा लिया और आगरा सहित ब्रज क्षेत्र की जनता को मुगलिया अत्याचार से मुक्ति दिलाई। महाराजा सूरजमल उनके पुत्र महाराजा जवाहर सिंह व महाराजा रन्जीत सिंह एवं महाराजा रतन सिंह ने 13 वर्ष तक आगरा के किले पर शासन किया और संपूर्ण जन मानस को मुगलिया अत्याचारों से मुक्ति दिलाने का काम किया, लेकिन यह विडंबना ही कही जाएगी कि महाराजा सूरजमल व उनके पुत्र महाराजा जवाहर सिंह की आगरा में एक प्रतिमा तक स्थापित नहीं हो सकी है। यद्यपि अखिल भारतीय जाट महासभा ने 2020 से तत्कालीन तत्कालीन, वर्तमान मेयर व मुख्यमंत्री जी को संबोधित ज्ञापन देकर महाराजा सूरजमल व महाराजा जवाहर सिंह की प्रतिमा आगरा किले के सामने स्थापित किए जाने की मांग लंबे समय से की है लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। अखिल भारतीय जाट महासभा के जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने राष्ट्रीय लोकदल के छपरौली से विधायक डॉ अजय कुमार के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को 22 अप्रैल 2025 को मांग पत्र भेजकर उनकी प्रतिमा आगरा किले के समक्ष स्थापित किए जाने का अनुरोध किया था इस पर निदेशक संस्कृति एवं पर्यटन विभाग उ प्र ने पुलिस आयुक्त आगरा व जिलाधिकारी आगरा को 31 जुलाई 2025 को पत्र भेजकर आगरा किले के समक्ष प्रतिमा स्थापना हेतु 10 बिंदुओं पर आख्या मांगी थी लेकिन अभी तक आख्या का भी अता पता नहीं है।
इसी परिपेक्ष में आज अखिल भारतीय जाट महासभा के जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने भाजपा जिला अध्यक्ष प्रशांत पौनियां के साथ सर्किट हाउस में पर्यटन एवं आगरा के प्रभारी मंत्री श्री जयवीर सिंह को अनुरोध पत्र दिया और मांग की कि की महाराजा सूरजमल और महाराजा जवाहर सिंह की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने हेतु आवश्यक प्रभावी कदम उठाए जाएं।
अनुरोध पत्र में प्रभारी मंत्री से निर्माणाधीन सिकंदरा मेट्रो स्टेशन का नाम वीर योद्धा रामकी चाहर के नाम पर रखे जाने की मांग की है।
विदित है कि राम की चाहर व राजाराम जाट ने सिकंदरा पर कब्जा करके अकबर की कब्र की कब्र खोद डाली थी और हड्डियों को जलाकर यमुना जी में वहा दिया था इन दोनों वीर योद्धाओं ने मुगलिया सल्तनत के सबसे क्रूर शासक औरंगजेब द्वारा वीर गोकुला जाट की आगरा कोतवाली पर 1 जनवरी 1671 को अमानुषिक तरीके से अंग अंग काटकर की गई हत्या के विरोध में किया था। लेकिन जिन योद्धाओं ने आगरा सहित ब्रज क्षेत्र के जनमानस के लिए अपने बलिदान दिए आज उनकी स्मृति को अक्षुण बनाए रखने के लिए शासकों व सक्षम लोगों के पास समय तक नहीं है। यहां तक कि पर्यटन निदेशालय से 31 जुलाई 2025 को पत्र जारी कर पुलिस आयुक्त व जिलाधिकारी से मांगी गई आख्या का भी अता पता नहीं है। अखिल भारतीय जाट महासभा ने इस कृत्य पर क्षोभ व्यक्त किया है।
आज प्रभारी मंत्री से मुलाकात कर मांग करने वालों में प्रमुख रूप से पूर्व ब्लाक प्रमुख व अखिल भारतीय युवा जाट महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष यशपाल राणा, पूर्व ब्लाक प्रमुख अकोला व युवा जाट महासभा के जिला संयोजक देवेंद्र चाहर, पूर्व उप प्रमुख फतेहपुर सीकरी भूदेव सिंह प्रधान, अखिल भारतीय जाट महासभा के महानगर अध्यक्ष गजेंद्र नरवार (पूर्व पार्षद), महामंत्री लोकेश चौधरी, पूर्व पार्षद कर्मवीर चाहर आदि थे।

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