उत्तराखंड

संस्कारों के साथ सफलता की राह दिखा रहा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय

हरिद्वार। आज का युवा केवल भौतिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अपने जीवन में संस्कार, आध्यात्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी महत्व देने लगा है। बदलते समय में युवाओं की सोच में यह सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है देवभूमि उत्तराखण्ड के देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, जो शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण और जीवन मूल्यों को भी प्राथमिकता देता है।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की विशेषता यह है कि यहाँ विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ ही जीवन जीने की सही दिशा भी प्रदान की जाती है। विश्वविद्यालय का वातावरण भारतीय संस्कृति, योग, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण है। यही कारण है कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में युवा यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते हैं।
विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार योग, पत्रकारिता, कम्प्युटर साइंस, थ्रीडी एनिमेशन, संगीत सहित विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही सांस्कृतिक गतिविधियों, योग प्रशिक्षण, संगीत, साहित्य और सामाजिक अभियानों के माध्यम से उनकी प्रतिभा को निखारा जाता है। यहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की सबसे प्रेरणादायक पहल इसकी अनिवार्य सामाजिक इंटर्नशिप है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई पूरी करने से पूर्व दो से तीन माह तक समाज के बीच रहकर सेवा कार्य करना होता है। इस दौरान छात्र ग्रामीण क्षेत्रों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों में जाकर जनजागरण, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों में भाग लेते हैं। इससे उनमें सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और मानवीय संवेदनाएँ विकसित होती हैं।
विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को संस्कारित, आत्मनिर्भर और समाजोपयोगी बनाना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने भारत सहित अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन, रूस और लिथुआनिया सहित कई देशों के शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इन सहयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन, शोध और इंटर्नशिप के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
संस्कार, सेवा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय के कारण देवसंस्कृति विश्वविद्यालय आज युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। यही कारण है प्रवेश प्रारंभ होने से पूर्व ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

Share this post to -

Related Articles

Back to top button