अब वक्त आ गया है कि जनसंख्या नीति को बदल दिया जाए: लक्ष्मण प्रसाद

हिन्दुस्तान में गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रदूषण सबसे बड़ी समस्याऐं हैं और इनमें भी सबसे मुख्य समस्या अत्यधिक जनसंख्या है क्योंकि यह गरीबी, बेरोजगारी और प्रदूषण को भी बढ़ाती है। अनेक योजनाओं और प्रयोजनों के बावजूद यह स्पष्ट प्रतीत है कि सरकार इन समस्याओं के उचित निवारण के लिए गंभीर नहीं, जिसको निम्नलिखित बिंदुओं में समेकित किया जा सकता है-
राजनेता क्यों ध्यान नहीं देते- कारण, संजय गांधी जी के प्रयासों से पुरुष नसबंदी अभियान 1975-77 में चलाया गया था, उस अभियान के दायरे में सरकारी कर्मचारी को लेना सरकार की भूल साबित हुई, तत्कालीन प्रशासन ने सरकार को बदनाम करने के लिए कुंवारे और साधुओं की भी नसबन्दी की, जिससे सरकार की बदनामी हुई तथा ऐसे आरोप हैं कि मतगणना में भी गड़बड़ियां उस समय कर्मचारियों द्वारा की गई। तब से लेकर आज तक राजनेता कुर्सी प्रेम के कारण इस मुद्दे से दूर रहते हैं।
जनवृद्धि का समर्थन करने वालों के तर्क –
1• हमारी अतिरिक्त (एक्स्ट्रा) संतानें सरकार से कुछ नहीं ले रही। परिवार से मिलकर समाज और समाज मिलकर सरकार को बनाता है, सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं, अतिरिक्त संतान देश के भीतर किसी ना किसी का रोजगार खत्म कर रही है, अतिरिक्त संतानो का बोझ सरकार पर नही तो समाज पर पड़ता है, यदि समाज से कुछ नहीं ले रहे तो रेगिस्तान या विदेश से जीविका कमाकर दिखाओ।
2• बच्चे ईश्वर (अल्लाह) की देन होते हैं- यह सोच गलत है, ईश्वर की देन तो ईसा थे जो कुंवारी मरियम से पैदा हुऐ थे यदि आपका बच्चा बीबी से केवल हाथ मिलाने से पैदा हो जाये तो अल्लाह की देन कह सकते हैं। हिन्दू और मुस्लिम, दोनों ने एक-दूसरे से डरकर खूब अपनी आबादी बढ़ाई है।
अल्पसंख्यक होने का अर्थ कमजोर होना नहीं- जनसंख्या वृद्धि का समर्थन करने वालों को कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सदैव स्मरण रखने चाहिये कि, 1.5 (डेढ़) लाख अंग्रेज 34 करोड़ हिन्दुस्तानियों पर राज करते थे (यह भी जानें- अल्पसंख्यक यहूदी जाति के पास 83 नोबुल पुरस्कार, कूका आन्दोलन में अल्पसंख्यक सिक्खों की भूमिका, एक छोटे देश वियतनाम से युध्द में अमेरिका की हार।)
नीतिगत त्रुटियाँ – नियोजन साधनों तक गरीबों की पहुँच ना होना जैसे-
सरकार ने घर-घर तक पोलियो ड्राप पहुंचाया वैसे ही जनसंख्या के नियोजन साधन (कंडोम, जैल, गर्भ-निरोधक इंजेक्शन) नहीं पहुंचाये गये।
अब से 30 साल पहले यह मांग उठी थी कि, प्रत्येक आबादी क्षेत्र में कंडोम मशीनें लगाई जाये जहां लोगों को 2 रु का सिक्का डालकर 1 कंडोम मिल जाये, यह कार्य आज तक नहीं हो पाया है। नियोजन साधनों की आसान उपलब्धता के बाद ही आप गरीबों को दोषी कह पायेंगे।
क्या होना चाहिए- यदि एक गरीब 5 बच्चे पैदा करता है तो वह 5 नये गरीब होंगे और एक अमीर यदि 5 बच्चे पैदा करता है तो वह 5 नये अमीर होंगे, इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुऐ यदि कानून बनाया जाये तो वह सफल होगा।
1. जनसंख्या गणना में 2 लड़कियों को 1 लड़के के बराबर माना जाये।
2. सरकारी कर्मचारियों को 2 चाइल्ड पॉलिसी से अलग किया जाये।
3. अमीरों को अधिक बच्चे पैदा करने की कानूनन छूट हो।
4. जिनके केवल 1 संतान है उसकी आकस्मिक मृत्यु पर तत्काल 1 लाख रु सहायता और सरकार पीडित परिवार (मध्यम/निम्नआयवर्ग) को साढ़े 7 हजार रु मासिक भत्ता आजीवन दे। जिनकी एकमात्र संतान विकलांग हो उन्हें भी विकलांगता के प्रतिशत अनुसार भत्ता दिया जाना चाहिए।
5• एक कम आय वाले परिवार में यदि 2 लडकी और 1 लड़का है तो उसे आबादी बढाने का दोषी नहीं माना जाये।
6• अमीरों को प्रति 5 करोड रु की अतिरिक्त स्थिर संम्पत्ति पर अगला बच्चा पैदा करने की छूट हो, अधिकतम 10 बच्चे।
7• सरकारी कर्मचारियों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अथवा दंम्पत्ति को 2 बच्चे, तृतीय श्रेणी कर्मचारी को 3 बच्चे, द्वितीय श्रेणी कर्मचारी को 4 बच्चे और प्रथम श्रेणी कर्मचारी को 5 बच्चे पैदा करने की कानूनन अनुमति हो।
8• अतिरिक्त बच्चे होने पर प्रति 2 बच्चों को प्रति 1 बच्चे का राशन मिले और
अतिरिक्त संतानों को 35 वर्षायु तक मताधिकार नहीं मिले, यदि वह उच्च स्नातक हो जाते हैं तो यह अधिकार 25 वर्षायु में दे दिया जाये।
9• जिन परिवारों ने षड्यंत्र करके कन्या संतति को जन्म नहीं दिया वहां किसी को अपनी बेटी नहीं देनी चाहिये (ऐसे परिवार अनाथाश्रम से लड़की गोद लेकर पालें), वन चाइल्ड पॉलिसी का पालन करने वालों पर यह सामाजिक दवाब (लड़की गोद लेने का) नहीं होना चाहिये।
10• IVF द्वारा कन्या संतति निर्धारित करने की कानून द्वारा छूट दी जाये।
11• सेरोगेसी मान्य की जाये, शर्तें- क• महिला विवाहित हो और उसके पास 1 संतान अवश्य हो, ख• आयु 23 से 36 वर्षायु के मध्य हो, ग• सेरोगेसी चाहने वाले उसका 25 लाख रु का बीमा 2 वर्ष के लिए कराऐं, घ• 25 हजार रु मासिक (कुल 15 माह तक) और ड़• बच्चा प्राप्त करने पर 10 लाख रु दें, च• miscarriage होने पर (4 माह से अधिक का) 3 लाख रु दें।
संदेश- जो विकसित नहीं है उसका कारण कुपोषण है, वह शोषित होते हैं फलस्वरूप विद्रोही होते हैं और आबादी बढ़ाने को अपनी ताकत समझते हैं,
उन्हें समझना चाहिये कि, यदि वह 4 बच्चों के बजाय 2 बच्चे पैदा करेंगे तो उनका विकास अधिक कर पायेंगे, विकसित को न्याय स्वतः मिल जाता है इस तरह निम्नआय वर्ग के लोग एक तरह के दुष्चक्र में फंसे हुऐ हैं।
(‘आपके जीवन की समस्याएँ और उनके समाधान’ नाम से उपलब्ध ई-बुक में संग्रहित आलेख के संपादित अंश)
लक्ष्मण प्रसाद




