
लखनऊ। गोरक्ष धाम में गुरु शिष्य परम्परा की सनातन परम्परा को महत्व दिया गया। इसके अंतर्गत आध्यात्मक साधना के साथ समाज और राष्ट्र सेवा का विचार भी समाहित रहा है।
योगी आदित्यनाथ संन्यासी है। पूरे विधि विधान से इस धर्म का पालन करते है। संन्यास ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने अपने परिवार का त्याग कर दिया था। योगी आदित्यनाथ ने इस नियम का अंतःकरण से पालन किया। यह भी एक प्रकार की साधना है। योगी इस पर भी अमल करते है किंतु विशेषता यह कि उन्होंने संन्यास के साथ समाज सेवा का समन्वय किया। यह गोरक्ष पीठ की परम्परा रही है। भारतीय चिंतन में भी इसकी मान्यता है स्वयं संन्यासी के रूप में रहते हुए भी समाज की सेवा की जा सकती है। योगी आदित्यनाथ ने इस मार्ग का अनुशरण किया। वह पांच बार सांसद रहे। पांच वर्ष से मुख्यमंत्री है। किंतु पूर्व आश्रम परिवार से अनाशक्त रहे। समाज को परिवार मानते हुए संन्यास पथ पर सतत आगे बढ़ते रहे।