लेख
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“सामाजिक महामारी (जाति प्रथा) से समतामूलक (समरसता) समाज की दिशा में प्रयाण: पुनर्निर्माण, पुनर्जागरण, नवचिंतन और परिवर्तन का आंदोलन”
“सामाजिक महामारी (जाति प्रथा) से समतामूलक (समरसता) समाज: पुनर्निर्माण, पुनर्जागरण, नवचिंतन और परिवर्तन का आंदोलन” विषय केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं,…
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AI टूल्स का बढ़ता प्रभाव: सुविधा या निर्भरता?
आज का युग तकनीक का युग है और इस तकनीकी क्रांति के केंद्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)…
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जातिवाद की वास्तविकता: ईश्वर व प्रकृति नहीं वल्कि मानवनिर्मित सामाजिक संरचना की असमानता”
“जातिवाद की वास्तविकता: ईश्वर व प्रकृति नहीं बल्कि मानव-निर्मित सामाजिक संरचना की असमानता” विषय भारतीय समाज की उस जटिल संरचना…
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“संत गाडगे महाराज: अंधविश्वास उन्मूलन से समतामूलक समाज निर्माण तक के लोकनायक व अग्रदूत”
भारतीय समाज के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने केवल उपदेश नहीं दिए, बल्कि अपने जीवन को ही…
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“कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं भारतीय ज्ञान परंपरा: संवाद, नैतिक मूल्यों और सामूहिक प्रज्ञा के पुनर्संरचनात्मक विमर्श की रूपरेखा”
इक्कीसवीं शताब्दी को यदि किसी एक केंद्रीय शक्ति ने सबसे अधिक प्रभावित किया है तो वह है कृत्रिम बुद्धिमत्ता। यह…
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“अखण्ड और विकसित भारत की परिकल्पना में सामाजिक समरसता: आंबेडकर और आरएसएस के साझा वैचारिक आधार”
“अखण्ड और विकसित भारत” की परिकल्पना केवल भौगोलिक अखंडता या आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे…
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भारत -यूरोपियन यूनियन का ऐतिहासिक व्यापार समझौता, आर्थिक सहयोग का एक नया युग
भारत और यूरोपियन यूनियन के मध्य 27 जनवरी 2026 को हुआ ससझौता एक व्यापक बदलाव वाला समझौता है। यह बहु…
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प्रख्यात क्रांतिकारी, लेखक तथा संपादक – पंडित वचनेश त्रिपाठी
वर्ष 1920 में उत्तर प्रदेश के जनपद हरदोई के संडीला मे जन्मे वचनेश त्रिपाठी न केवल एक महान क्रांतिकारी थे…
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“उत्तर प्रदेश: संस्कृति, सहअस्तित्व और सौहार्द (गंगा-जमुनी तहज़ीब) की भूमि”
भारत की सांस्कृतिक चेतना में यदि किसी भूभाग ने अपनी बहुरंगी परंपराओं, आध्यात्मिक ऊँचाइयों और सामाजिक समन्वय की अद्भुत परंपरा…
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धर्मांतरण गैंग के चक्रव्यूह में फंसते शंकराचार्य
‘कल्पवासियों के लिए तो माघ मेला आज ही समाप्त हो गया।’ रुंधे गले से एक सद्य:स्नाता प्रौढ़ा का यह कथन…
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“महादेव गोविंद रानाडे: सामाजिक सुधार, स्त्री-उत्थान और आधुनिक भारत के नैतिक पुनर्निर्माण के अग्रदूत”
महादेव गोविंद रानाडे भारतीय नवजागरण के उन विराट व्यक्तित्वों में से थे जिनके चिंतन और कर्म ने उन्नीसवीं शताब्दी के…
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