लेख
-
सामाजिक समरसता के प्रतीक भगवान श्रीराम
भारत विविधतापूर्ण भाषा संस्कृति वाला देश है। देश को एक सूत्र में पिरोकर रखने के लिए ऐसे नेतृत्व की सदैव…
Read More » -
“मैं नास्तिक क्यों हूँ: भगत सिंह के वैचारिक प्रतिरोध का समकालीन परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण”
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी योद्धा के रूप में ही नहीं, बल्कि एक गहन…
Read More » -
दुनिया विनाश की ओर बढ़ रही है. युद्ध को समाप्त भारत ही करा सकता है : ललित चाहर
ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले को 20 दिन बीत चुके हैं. पेट्रोल और डीजल…
Read More » -
प्रदेश के नव निर्माण के नौ वर्ष
वर्ष 2017 में विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी भाजपा गठबंधन की सरकार ने नौ…
Read More » -
संघ और रॉ पर प्रतिबंध की मांग: भारत विरोधी डीप स्टेट की नई साजिश
युद्ध के वैश्विक वातावरण के मध्य अमेरिका में भारत विरोधी डीप स्टेट की गतिविधियां भी चल रही हैं। विभिन्न अवरोधों…
Read More » -
समरसता से समृद्धि तक: उत्तर प्रदेश की विकासोन्मुख नीतियां (शांति, सुरक्षा, सौहार्द, समता, रोजगार सृजन) और विकसित भारत का लक्ष्य’
समकालीन भारत में “विकसित भारत” का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति का संकेतक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, राजनीतिक स्थिरता,…
Read More » -
नूतन गर्ग (दिल्ली) को नेपाल से स्त्री शक्ति सम्मान से अलंकृत किया गया
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के पावन अवसर पर “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउन्डेशन नेपाल” द्वारा आपको “स्त्री शक्ति सम्मान”…
Read More » -
युद्धकाल का संकट, राजनीति और नागरिक कर्तव्य
अमेरिका -इजराइयल और ईरान युद्ध को प्रारंभ हुए 15 दिन का समय व्यतीत हो चुका है और अभी भी युद्ध…
Read More » -
सामाजिक न्याय से सत्ता-भागीदारी तक: मान्यवर कांशीराम साहब की राजनीतिक दृष्टि और बहुजन आंदोलन का लोकतांत्रिक महत्व”
भारतीय लोकतंत्र का वैचारिक आधार समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों पर निर्मित माना जाता है, किन्तु सामाजिक संरचना की…
Read More » -
धर्म और शासन की जद्दोजहद के बीच
आप जानते हैं गुरुवर कि कितनी कठिनाई से इस आयु में मुझे चार पुत्रों की प्राप्ति हुई है। इन सुकुमार…
Read More » -
“सामाजिक महामारी (जाति प्रथा) से समतामूलक (समरसता) समाज की दिशा में प्रयाण: पुनर्निर्माण, पुनर्जागरण, नवचिंतन और परिवर्तन का आंदोलन”
“सामाजिक महामारी (जाति प्रथा) से समतामूलक (समरसता) समाज: पुनर्निर्माण, पुनर्जागरण, नवचिंतन और परिवर्तन का आंदोलन” विषय केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं,…
Read More »